BRICS से पहले दिल्ली में फिर सियासी हलचल: 5 सितंबर को CJP का मार्च, 12-13 सितंबर को दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा
नई दिल्ली। भारत इस साल 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत प्रमुख BRICS देशों के नेताओं के पहुंचने की संभावना है। इसी बीच राजधानी दिल्ली में 5 सितंबर को एक नए विरोध मार्च के ऐलान ने सुरक्षा और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
CJP यानी Cockroach Janta Party ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि 25 जुलाई को सरकार की ओर से किए गए कुछ आश्वासनों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और आंदोलन से जुड़े लोगों तथा प्रभावित परिवारों को लेकर किए गए आश्वासनों का मुद्दा प्रमुख है। CJP के मुताबिक मार्च में NEET से जुड़े मृतक छात्रों के परिवार और कथित पुलिस बर्बरता के पीड़ित भी शामिल होंगे।
यह तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इसके ठीक एक सप्ताह बाद, 12-13 सितंबर को दिल्ली में BRICS का शिखर सम्मेलन होना है। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत सालभर विभिन्न मंत्रीस्तरीय और आधिकारिक बैठकें हो चुकी हैं और अब गतिविधियों का केंद्र राजधानी बनने जा रहा है। सरकार की तैयारियां भी तेज हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल ने हाल ही में BRICS सम्मेलन को लेकर सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और तैयारियों की समीक्षा की है।
शी जिनपिंग की संभावित दिल्ली यात्रा पर दुनिया की नजर
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी कूटनीतिक दिलचस्पियों में भारत-चीन संबंध भी शामिल हैं। Reuters की 24 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग के सितंबर में नई दिल्ली आने की संभावना है और चीनी पक्ष बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ आने की तैयारियां कर रहा है। यदि यह यात्रा होती है तो 2019 के बाद शी की भारत यात्रा होगी।
भारत और चीन के रिश्ते 2020 के गलवान संघर्ष के बाद बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि 2024 में सीमा पर तनाव कम करने के लिए हुए समझौते और उसके बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क बढ़ा है। ऐसे में BRICS सम्मेलन मोदी-शी संभावित मुलाकात के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी भी सम्मेलन को रणनीतिक महत्व देती है। BRICS में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय व्यवस्था, डॉलर पर निर्भरता कम करने, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। रूस की ओर से BRICS के भीतर अनाज व्यापार के लिए अलग एक्सचेंज जैसी पहल का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
2020 की दिल्ली हिंसा की याद क्यों आ रही है?
दिल्ली में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले 2020 की घटनाओं का संदर्भ इसलिए सामने आना स्वाभाविक है क्योंकि फरवरी 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हिंसा भड़क गई थी।
ट्रंप 24 और 25 फरवरी 2020 को भारत दौरे पर थे। 24 फरवरी को उनके दिल्ली पहुंचने से पहले ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन और विरोध में जुटे समूहों के बीच हिंसक झड़पें शुरू हो गई थीं। हिंसा ने अगले दिनों में गंभीर रूप ले लिया और कई लोगों की मौत हुई। Reuters ने उस समय इसे ट्रंप की भारत यात्रा पर छाई दिल्ली हिंसा के रूप में रिपोर्ट किया था।
बाद में इस हिंसा की जांच बड़े षड्यंत्र के मामले तक पहुंची, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि फरवरी 2020 में CAA और प्रस्तावित NRC के विरोध के नाम पर व्यापक हिंसा की साजिश रची गई। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के फैसले में अभियोजन पक्ष के इसी आरोप का उल्लेख किया गया है।
लेकिन CJP को 2020 के ‘इकोसिस्टम’ से जोड़ना कितना सही?
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील हिस्सा है।
BRICS से पहले दिल्ली की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
5 सितंबर का मार्च और 12-13 सितंबर का BRICS सम्मेलन—दोनों के बीच केवल सात दिन का अंतर है। इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं, लेकिन प्रशासन को दोनों के लिए अलग-अलग सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन की तैयारी करनी होगी।
BRICS सम्मेलन में बड़ी संख्या में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, अधिकारियों, सुरक्षा अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों के आने की संभावना है। दिल्ली पहले से ही सम्मेलन की तैयारियों में जुटी है। ऐसे में किसी भी बड़े प्रदर्शन, जुलूस या अचानक जुटने वाली भीड़ का असर राजधानी के ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। दिल्ली के उपराज्यपाल की समीक्षा बैठक में भी विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और समयबद्ध तैयारियों पर जोर दिया गया है।
असली परीक्षा सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की
दिल्ली के लिए आने वाले दिन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि राजधानी को एक साथ दो अलग-अलग तरह की परिस्थितियों से निपटना होगा—एक तरफ लोकतांत्रिक तरीके से होने वाले विरोध प्रदर्शन और दूसरी तरफ दुनिया के बड़े नेताओं की मेजबानी।
5 सितंबर का CJP मार्च शांतिपूर्ण रहने की घोषणा के साथ सामने आया है। यदि प्रदर्शन तय कार्यक्रम के मुताबिक शांतिपूर्ण रहता है तो यह लोकतांत्रिक विरोध का सामान्य हिस्सा होगा। लेकिन यदि भीड़ बढ़ती है, मार्ग बदलने की कोशिश होती है या किसी प्रकार की हिंसा अथवा टकराव की स्थिति पैदा होती है, तो इसका असर BRICS से पहले दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
2020 की हिंसा की स्मृति के कारण अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी दिल्ली में होने वाली किसी बड़ी घटना को अतिरिक्त नजर से देख सकता है। उस समय ट्रंप की यात्रा के दौरान हुई हिंसा ने भारत की वैश्विक छवि और घरेलू राजनीतिक तनाव दोनों को लेकर व्यापक बहस पैदा की थी।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तस्वीर यह है: 5 सितंबर को CJP का अलग मुद्दे पर विरोध मार्च प्रस्तावित है और 12-13 सितंबर को भारत BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी सम्मेलन को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। 2020 की दिल्ली हिंसा और उससे जुड़े कानूनी मामलों की पृष्ठभूमि जरूर मौजूद है, लेकिन मौजूदा CJP प्रदर्शन को सीधे उस पुराने नेटवर्क या मामले से जोड़ने का प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है।
आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा नजर तीन चीजों पर रहेगी—CJP के मार्च का स्वरूप, दिल्ली पुलिस की सुरक्षा एवं ट्रैफिक व्यवस्था और BRICS में आने वाले विदेशी नेताओं की अंतिम यात्रा पुष्टि।
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