कांग्रेस के समय कार्य पद्धति एवं परंपराएं हुईं थी दूषित, शासकीय संस्थाएं हुईं बर्बाद : विजय शर्मा

कांग्रेस के समय कार्य पद्धति एवं परंपराएं हुईं थी दूषित, शासकीय संस्थाएं हुईं बर्बाद : विजय शर्मा

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अक्टूबर 2025

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने निवास कार्यालय में आज पत्रकारो से चर्चा करते हुए कहा कि विगत कॉंग्रेस शासनकाल में शासन पद्धतियां एवं परंपराएं दूषित हो गयी थीं, उन्होंने शासकीय संस्थाओं को भी बर्बाद करने का कार्य किया गया था। कोई भी संवैधानिक संस्था हो या अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन उचित तरीके से नहीं कर पाते थे, केवल भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों का ही वर्चस्व हुआ करता था। जिसका जीवंत उदाहरण सीजीपीएससी में हुए घोटाले में साफ तौर पर नजर आता है। आज कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता जो लड़की हूँ लड़ सकती हूँ का नारा दिया करती थीं उनकी अपनी पार्टी की महिला कार्यकर्ता के साथ अभद्रता होती है और सूरजपुर में कांग्रेस के नेता द्वारा बलात्कार व हत्या की जाती है, रायपुर में महिला अधिकारी के साथ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा उनके केबिन में घुसकर दुर्व्यवहार किया जाता है पर उनके सभी नेता मौन हैं। पिछली सरकार ने पूरे राज्य में भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं। शासन तो केवल प्रशासन को जनहित में दिशा दिखाने का कार्य करता है, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के शासनकाल में किसी भी अधिकारी को किसी अवैधानिक कार्य के लिए प्रेरित नहीं कराया जाता है। उन्होंने कहा कि अब यह सिर्फ एक राजनैतिक विरोधी के रूप में नहीं कहता बल्कि हाल की घटनाओं, आंकड़ों, दस्तावेजी प्रमाणों एवं माननीय न्यायालयों के कथनों एवं निर्णयों से यह बात प्रमाणित भी हो गयी है। उन्होंने विभिन्न मामलों में कॉंग्रेस के विधायकों एवं उनके करीबियों के विभिन्न घोटालों, हथियार की सप्लाई में संलिप्तता, हत्या, रेत के अवैध परिवहन में संलिप्तता एवं बस्तर क्षेत्र में पत्रकार की हत्या में शामिल होने को रेखांकित करते हुए बताया कि कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व से लेकर नीचे तक विभिन्न पदाधिकारी अपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। अब अगर कांग्रेसी यह सोचेंगे कि धरना आंदोलन कर दबाव बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई न की जाए तो यह संभव नहीं है। इन्होंने कहा विगत सरकार में पुलिस के अधिकारियों को भी ना छोड़ते हुए उनपर भी फर्जी प्रकरण बनाये गए थे। अभी हाल ही में रायपुर की एक महिला अधिकारी के चेंबर में घुसकर के गाली गलौच की गई। यह विरोध का तरीका नहीं होता है। हमने भी आंदोलन किए हैं लेकिन हमनें कभी अपनी मर्यादा नहीं पार की किसी के दरवाजे से अंदर कदम नहीं रखा। विपक्ष के रूप में विगत सरकार की गलत नीतियों को सामने लाने विरोध जताया पर अपनी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन कभी नहीं किया। आंदोलन का स्वरूप क्या होना चाहिए इस पर स्पष्टता होनी चाहिए, लोकतंत्र में एक महिला अधिकारी के चेंबर में जाकर अभद्रता करना क्या लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है? अपनी हदों को समझाना चाहिए, लोकतंत्र में विपक्ष की अहम भूमिका होती है और विरोध भी स्वाभाविक है पर विरोध का कारण व तरीका क्या हो उनको समझाना चाहिए।

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