जांजगीर/पामगढ़19/09/021भूपेश सरकार की नरवा, गरवा, घुरूवा, बारी योजना के तहत गायों के संरक्षण के लिए गांवों में गौठान का निर्माण किया गया है। लेकिन यह योजना पूरी तरह से निष्क्रिय होती हुई नजर आ रही है। अव्यवस्था के कारण गांवों के गौठानों में आय दिन गायों की मौत हो रही है।
ग्राम पंचायत कोसला के गौठान की स्थिति बद से बद्तर दिखाई दे रही है, यहां गायों का जीना बेहद ही मुश्किल हो गया है, खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगते हुए गाएं जीने को मजबूर हैं।
न तो पानी से बचने के लिए छत की व्यवस्था की व्यवस्था की गई है और ना ही गायों के खाने के लिए चारा की व्यवस्था है। जिसके कारण गायों की आय दिन मौत हो रही है। गौठान के चारों तरफ पानी से भरे हुए गड्ढे हैं, किचड़ व दलदल में फंसने से भी गायों की मौत हो रही।

बची खुची गाएं व उनके छोटे-छोटे बछड़े भुख से तड़प रहे हैं जिनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। जबकि गायों की देखरेख करने के लिए हर ग्राम पंचायतों में गौठान समितियां बनाई गई है।गायों के तड़प-तड़प कर मर जाने के बाद आस-पास ही उनके लासों को ठिकाना लगा दिया जाता है, कुछ लाशें तो गौठान के अंदर ही सड़ते रह जाते हैं। जिसे चील, कौंवे व कुत्ते नोंच-नोंचकर खाते रहते हैं।
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