यूपी में SC-ST राहत राशि के दुरुपयोग की होगी जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए प्रदेशव्यापी जांच के आदेश

यूपी में SC-ST राहत राशि के दुरुपयोग की होगी जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए प्रदेशव्यापी जांच के आदेश

यूपी में SC-ST राहत राशि के दुरुपयोग की होगी जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए प्रदेशव्यापी जांच के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ितों को दी जाने वाली आर्थिक राहत राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने पूरे प्रदेश में राहत राशि के वितरण और उसके संभावित दुरुपयोग की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विशेष अदालत महज एक औपचारिक संस्था नहीं है। नियम 12(7) के तहत विशेष अदालत को यह जांचने का अधिकार है कि पीड़ित को समय पर पर्याप्त राहत मिली है या नहीं। आवश्यकता होने पर अदालत बकाया राहत राशि दिलाने का आदेश भी दे सकती है।

तीन महीने में जांच पूरी करने के निर्देश

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि संतोष कुमार दोहरे और उनके परिवार को विभिन्न आपराधिक मामलों में अब तक 23,36,250 रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। हालांकि, करीब 10 से 12 मामले जिला स्तरीय समिति के समक्ष लंबित बताए गए।

इस पर हाईकोर्ट ने झांसी के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को इन मामलों तथा दी गई राहत राशि की निष्पक्ष जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।

प्रदेशभर में खंगाली जाएगी राहत राशि

हाईकोर्ट के आदेश का दायरा केवल झांसी तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने SC-ST एक्ट के तहत पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के वितरण में संभावित अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रदेश में जांच के निर्देश दिए हैं।

अब जांच में यह देखा जाएगा कि राहत राशि किन मामलों में जारी की गई, लाभार्थियों को वास्तव में कितनी राशि मिली और कहीं नियमों का उल्लंघन या सरकारी धन के दुरुपयोग की स्थिति तो नहीं बनी।

मुख्य बात: कोर्ट का जोर इस बात पर है कि SC-ST एक्ट के पीड़ितों के लिए निर्धारित राहत राशि सही लाभार्थी तक, सही समय पर और नियमानुसार पहुंचे।

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