रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में आज बड़ा फैसला सामने आया है। NIA की विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई के बाद 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। करीब 13 साल पुराने इस मामले के फैसले पर पूरे छत्तीसगढ़ की नजर टिकी हुई थी। न्यायधीश अजय सिंह राजपूत ने फैसला सुनाया है। अब दोषियों को किस अपराध में कितनी सजा मिलेगी, इस पर अदालत 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।
25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। NIA ने मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चला था, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और अंतिम बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था।
अब अदालत के फैसले के बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा भी तय होगी। झीरम हमले में जान गंवाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिजनों की निगाहें भी इस फैसले पर टिकी हुई थीं।
सभी 10 आरोपियों के नाम
- प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति (Pramila Kodiyam @ Jyoti)
- बंजामी उर्फ सन्ना (Banjami @ Sanna)
- अयाता मरकाम / अयाता माड़कम (Ayata Markam)
- मुक्का मंडावी (Mukka Mandavi)
- मड़कामी देवा (Madkami Deva)
- कवासी कोसा (Kawasi Kosa)
- चौतू उर्फ मुन्ना (Chautu @ Munna)
- कोसा कवासी (Kosa Kawasi)
- महादेव नाग (Mahadev Nag)
- सुमित्रा (जिसे बाद में गिरफ्तार किया गया था) / या अन्य सह-आरोपी जो इस ट्रायल का हिस्सा रहे.
कई बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा में बड़ी सभा के बाद लौट रहा था. इसी दौरान झीरम घाटी के घने जंगलों में हथियारबंद माओवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया. इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी.
मरने वालों में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे. हमले में कई सुरक्षाकर्मी और कांग्रेस कार्यकर्ता भी मारे गए थे. गंभीर गोली लगने के बाद इलाज के दौरान विद्याचरण शुक्ल की भी मौत हो गई थी.
अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए
एनआईए ने इस मामले में 25 सितंबर 2014 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों के नाम शामिल थे. इसके बाद दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद एनआईए ने 28 सितंबर 2015 को 35 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की. मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई. वहीं, 33 नामजद आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं. अंतिम दलीलें पूरी होने से पहले अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए थे.
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