कवि सुनील और भास्कर की रचनाओं का कवितापाठ का आयोजन..डॉ. देवेंद्र ने कहा- परसाई की साहित्यिक प्रतिभा छिटककर बिलासपुर में आ गई..

कवि सुनील और भास्कर की रचनाओं का कवितापाठ का आयोजन..डॉ. देवेंद्र ने कहा- परसाई की साहित्यिक प्रतिभा छिटककर बिलासपुर में आ गई..

बिलासपुर / 25जनवरी 2022

छत्तीसगढ़ बिलासा साहित्य मंच’ के तत्वावधान में कविद्वय सुनील शर्मा और भास्कर मिश्र के कविता पाठ का आयोजन किया गया। प्रेस क्लब में हुए इस आयोजन में मुख्य अतिथि कथाकार डॉ. देवेन्द्र, विभागाध्यक्ष गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, एवं अध्यक्षता शिक्षाविद् संजय पांडे और प्रेसक्लब अध्यक्ष वीरेंद्र गहवाई रहे। कविता पाठ के अंत मे डॉ.देवेन्द्र ने कहा कि सुनील और भास्कर कविताओं को सुनने के बाद लगा कि परसाई की साहित्यक प्रतिभा छिटककर बिलासपुर आ गई है।

कार्यक्रम की शुरुआत सुनील शर्मा ने अपनी पहली कविता मां को समर्पित करते हुए पढ़कर की, और अपने जीवन के रोजमर्रा के अनुभवों से जुड़ी कविताएं पढ़ी। जबकि भास्कर मिश्र ने अपने चिर परिचित शैली में मुक्तक फिर गीत का पाठ किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ देवेन्द्र ने कहा कि कविता संवेदना की अभिव्यक्ति है। कवि अपने आसपास की चीजों का जितने गहराई से अनुभव करता है वह उतना ही बेहतर लिख पाता है। उन्होंने दोनों कवियों की शैली और लेखनी में शिल्प, कथ्य, भाव पर अपनी बात रखी। डॉ देवेंद्र ने कहा कि इस कवितापाठ ने किसी बड़े मंच का अनुभव कराया, इतनी अच्छी कवितापाठ की उम्मीद नहीं कि थी। भास्करजी कि वो कविता जिसमें वो कहते है कि “देशी घी का स्वाद जानते है पटवारी, तुम क्या जानो…बेजोड़ कविता है। राष्ट्रीय स्तर के मंच पर कहने लायक रचना है। इस मंच से लगा कि यहीं-कहीं बगल में हरिशंकर परसाई रहते है और उनकी साहित्यिक प्रतिभा छिटककर बिलासपुर आ गई है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शिक्षाविद संजय पांडे कहा कि पत्रकारिता के साथ कविता आ जाए, तो कहने का प्रभाव दोगुना हो जाता है। बल्कि एक व्यस्ततम पेशे में होने के बाद भी इतनी मंझी हुई कविता करना अपने आप में एक बड़ी बात है। उन्होंने दोनों कवियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सुनीलजी की रचना में काब्य के सारे तत्व मौजूद है। रस, छंद, अलंकार सब कुछ समाहित है। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से झूठ-सच दोनों में प्रेम को देखा है। ये कल्पना कोई कवि ही कर सकता है। सुनीलजी की रचना मानवीयता को स्वर देने वाली रचना है। इसी तरह भास्करजी में अपनी बात को कहने की जबरदस्त शैली है। अपनी भावनाओं को शब्दों में बेहतरीन तरीके से पिरोते है। उनके पास संप्रेषण की कला भी जबरदस्त है। यदि इसे थोड़ा और मांजले तो शहर को एक राष्ट्रीय स्तर के कवि मिल सकता है।

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