जिले व ग्रामीण अंचलों में आज हर्षोल्लास के साथ हरेली पर्व मनाया जा रहा..

बिलासपुर : – किसान लोक पर्व हरेली पर आज खेती-किसानी में काम आने वाले उपकरण और बैलों की पूजा की गई। इस दौरान सभी घरों में पकवान बनाए गए। इस दिन कुलदेवता की भी पूजा करने की परंपरा है।

हरेली पर किसान नागर, गैंती, कुदाली, फावड़ा समेत कृषि के काम आने वाले सभी तरह के औजारों की साफ-सफाई कर उन्हें एक स्थान पर रखें और इसकी पूजा-अर्चना किए। इस अवसर पर सभी घरों में गुड़ का चीला बनाया गया। हरेली के दिन ज्यादातर लोग अपने कुल देवता और ग्राम देवता की पूजा करते हैं। कई घरों में कुलदेवता और ग्राम देवता को प्रसन्न करने के लिए मुर्गा और बकरे की बलि भी दी जाती है। लिहाजा, ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से शाम तक उत्सव जैसी धूम रही।

नारियल की बाजी : हरेली में गाँव व शहरों में नारियल फेंक प्रतियोगिता  हुई। सुबह पूजा-अर्चना के बाद गाँव के चौक-चौराहों पर युवाओं की टोली जुटी और नारियल फेंक प्रतियोगिता हुई। नारियल हारने और जीतने का यह सिलसिला देर रात तक चलेगा। इसी तरह नारियल जीत की धूम शहरों में भी देखने को मिली

तंत्र विद्या की होगी शुरुआत : श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी हरेली के दिन से तंत्र विद्या की शिक्षा देने की शुरुआत की हो जाती है।  तंत्र दीक्षा देने का यह सिलसिला भाद्र शुक्ल पंचमी तक चलेगा।

लोहार का महत्वः हरेली के दिन गाँव-गाँव में लोहारों की पूछपरख बढ़ जाती है। इस दिन लोहार हर घर के मुख्य द्वार पर नीम की पत्ती लगाकर और चौखट में कील ठोंककर आशीष देते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उस घर में रहने वालों की अनिष्ट से रक्षा होती है। इसके बदले में किसान उन्हे दान स्वरूप स्वेच्छा से दाल, चावल, सब्जी और नगद राशि देते हैं।

गेड़ी की रही धूमः हरेली में जहाँ किसान कृषि उपकरणों की पूजा कर पकवानों का आनंद लेते हैं, वहीं युवा और बच्चे गेड़ी चढ़ने का मजा लिए लिहाजा, सुबह से ही घरों में गेड़ी बनाने का काम शुरू हो गया था। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो इस दिन 20 से 25 फीट ऊँची गेड़ी बनवाते हैं।

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