Mahadev Betting Scam: महादेव सट्टा सिंडिकेट पर CBI का बड़ा खुलासा, हर महीने 450 करोड़ की अवैध कमाई; संरक्षण देने वाले लोकसेवक भी जांच के घेरे में

Mahadev Betting Scam: महादेव सट्टा सिंडिकेट पर CBI का बड़ा खुलासा, हर महीने 450 करोड़ की अवैध कमाई; संरक्षण देने वाले लोकसेवक भी जांच के घेरे में

रायपुर: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़े खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी अब इस सिंडिकेट को संरक्षण देने वाले लोकसेवकों की पहचान करने में जुटी है। इसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। वहीं, महादेव सट्टा ऐप के कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को CBI ने आठ दिन की रिमांड पर लिया है।

छह साल से चल रहा था करोड़ों का सट्टा कारोबार

जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, महादेव सट्टा सिंडिकेट का अवैध कारोबार पिछले करीब छह वर्षों से संचालित हो रहा था। इस दौरान हर महीने लगभग 450 करोड़ रुपये की अवैध कमाई होने का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

70 से 80 फीसदी रकम प्रमोटरों के पास

CBI की जांच के अनुसार, सट्टा कारोबार से होने वाली कुल कमाई का 70 से 80 फीसदी हिस्सा प्रमोटर अपने पास रखते थे। इस रकम के बंटवारे और उसे अलग-अलग माध्यमों से ठिकाने लगाने के तरीके की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से किस-किस को आर्थिक फायदा पहुंचा।

फर्जी दस्तावेजों से खोले गए बैंक खाते

सट्टे की रकम के लेन-देन के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इन खातों का इस्तेमाल अवैध कमाई को छिपाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किए जाने का संदेह है। जांच एजेंसी बैंक खातों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

हवाला के जरिए UAE भेजी जाती थी रकम

CBI के मुताबिक, सट्टा कारोबार से जुटाई गई रकम को हवाला नेटवर्क के जरिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजे जाने का खुलासा हुआ है। एजेंसी अब इस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। साथ ही विदेशों में मौजूद संपत्तियों और लेन-देन से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।

संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मी भी जांच के दायरे में

महादेव सट्टा सिंडिकेट को कथित तौर पर संरक्षण देने वाले लोकसेवकों की पहचान करना CBI की जांच का अहम हिस्सा है। एजेंसी यह पता लगाएगी कि अवैध कारोबार को जारी रखने में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। पुलिसकर्मियों की संलिप्तता और संरक्षण से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है। सौरभ चंद्राकर की आठ दिन की रिमांड के दौरान एजेंसी को इस पूरे नेटवर्क, उसकी कमाई और कथित संरक्षण तंत्र से जुड़े अहम सवालों के जवाब तलाशने हैं।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *