Supreme Court on Delhi Restrictions: नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने, इंटरनेट सेवा निर्बाध रखने और लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने सहित 5 अहम निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से यह भी पूछा है कि उसके पहले के आदेशों का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
दिल्ली में पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट की विशेष सुनवाई
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने दिल्ली में आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि विरोध-प्रदर्शन से पहले बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया, आवाजाही रोकी गई और इंटरनेट व परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए। याचिकाकर्ताओं ने 9 अक्टूबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मेट्रो सेवाएं प्रभावित हुईं, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पाबंदियां लगाई गईं और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। यह आरोप भी लगाया गया कि कुछ कार्रवाइयां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा वाले क्षेत्र के बाहर भी हुईं।
सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े निर्देश
1. मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रहेंगी
अदालत ने निर्देश दिया कि मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित किया जाए। सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत आवश्यक कानूनी प्रतिबंधों की स्थिति को छोड़कर परिवहन सेवाओं को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
2. बैरिकेडिंग और आवाजाही की समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यातायात नियमों के अधीन शहर में लोगों की आवाजाही की अनुमति दी जाए। कानून-व्यवस्था और यातायात की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की तत्काल समीक्षा करने का निर्देश भी दिया गया।
3. इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रहेंगी
अदालत ने इंटरनेट सेवाओं को बिना किसी रुकावट के जारी रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही शहर में आवाजाही को कानून के अनुरूप सुचारू बनाए रखने पर जोर दिया गया।
4. लोगों की आवाजाही बाधित न हो
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार दिल्ली में लोगों की आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। पाबंदियों के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
5. गैर-कानूनी हिरासत पर रोक
अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता। विशेष रूप से धारा 163 के दायरे से बाहर शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों के जमावड़े के संबंध में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
अवमानना मामले में सरकार को शो-कॉज नोटिस
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि 9 अक्टूबर के आदेश का कथित तौर पर पालन नहीं करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इसके लिए सरकार से 13 अक्टूबर तक जवाब मांगा गया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा। पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल भी एक याचिकाकर्ता की ओर से ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हुए। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को पहले दिए गए आदेश की याद दिलाई गई थी, जिसमें मेट्रो सेवाओं को अचानक बंद नहीं करने और लोगों की आवाजाही बाधित नहीं करने की बात कही गई थी।
वकीलों और पत्रकारों के काम में बाधा न आए
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने कामकाज और पेशेवर दायित्वों के निर्वहन में बाधा का सामना न करना पड़े।
इससे पहले, प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से एक दिन पहले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी अधिकारियों से मेट्रो स्टेशन बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करने और आम लोगों की असुविधा कम करने के लिए मेट्रो व रेल सेवाओं को पूरी तरह रोकने के बजाय नियंत्रित तरीके से संचालित करने पर विचार करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन और इंटरनेट सेवाओं को सुचारू रखना, लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करना और कानून के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया का पालन कराना है।
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