इंटरनेट के बिना मोबाइल पर चलेगा LIVE TV! D2M रोलआउट की तैयारी, जानिए कैसे बदलेगा टीवी देखने का तरीका
नई दिल्ली। भारत में मोबाइल पर टीवी देखने का तरीका जल्द बदल सकता है। केंद्र सरकार और सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती Direct-to-Mobile (D2M) तकनीक को कमर्शियल स्तर पर लाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस तकनीक के जरिए यूजर्स को मोबाइल फोन पर लाइव टीवी, समाचार, खेल और अन्य ऑडियो-विजुअल कंटेंट देखने के लिए इंटरनेट, Wi-Fi या मोबाइल डेटा की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, प्रसार भारती D2M के कमर्शियल रोलआउट के लिए Request for Proposal (RFP) जारी करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, देशभर में सेवा पूरी तरह कब उपलब्ध होगी, इसकी अंतिम समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
क्या है D2M तकनीक?
D2M यानी Direct-to-Mobile एक ब्रॉडकास्टिंग तकनीक है, जिसमें टीवी, रेडियो और डेटा जैसी सामग्री को इंटरनेट के बजाय ब्रॉडकास्ट नेटवर्क और रेडियो फ्रीक्वेंसी के माध्यम से सीधे मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाया जाता है।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं—जैसे रेडियो में स्टेशन सुनने के लिए मोबाइल डेटा या Wi-Fi की जरूरत नहीं होती, उसी तरह D2M में उपयुक्त डिवाइस ब्रॉडकास्ट सिग्नल को सीधे रिसीव कर सकता है।
सरकार ने भी D2M को ऐसी तकनीक के रूप में बताया है, जिसके जरिए SIM कार्ड या मोबाइल डेटा पर निर्भर हुए बिना वीडियो, ऑडियो और डेटा मोबाइल हैंडसेट तक पहुंचाया जा सकता है।
मोबाइल पर बिना इंटरनेट कैसे चलेगा TV?
आज मोबाइल पर YouTube, OTT या लाइव टीवी देखने के लिए इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल होता है। इसमें कंटेंट मोबाइल नेटवर्क या Wi-Fi के जरिए सर्वर से फोन तक पहुंचता है।
D2M में इसका तरीका अलग होगा। ब्रॉडकास्टर कंटेंट को ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के जरिए प्रसारित करेगा और D2M-सपोर्ट वाला मोबाइल फोन उस सिग्नल को रिसीव करेगा।
इसका मतलब है कि लाइव टीवी देखने के दौरान मोबाइल डेटा की खपत नहीं होगी।
क्या हर मोबाइल में चलेगा D2M?
नहीं। यही इस तकनीक की सबसे बड़ी शर्त है।
D2M सेवा का लाभ लेने के लिए मोबाइल फोन में संबंधित हार्डवेयर/रिसीविंग क्षमता और सॉफ्टवेयर सपोर्ट होना जरूरी होगा। मौजूदा हर स्मार्टफोन में यह सुविधा उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।
इसलिए भविष्य में बाजार में D2M-सपोर्ट वाले स्मार्टफोन या अन्य compatible devices की जरूरत पड़ सकती है।
कौन-कौन से कंटेंट देख सकेंगे?
D2M का इस्तेमाल केवल टीवी चैनलों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए कई तरह की सामग्री पहुंचाई जा सकती है, जैसे—
- LIVE TV
- समाचार चैनल
- खेल और लाइव स्पोर्ट्स
- मनोरंजन कार्यक्रम
- शैक्षणिक सामग्री
- ऑडियो और रेडियो कंटेंट
- आपातकालीन और आपदा संबंधी अलर्ट
- अन्य डेटा सेवाएं
सरकार ने D2M को मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा और critical/emergency communication के लिए भी उपयोगी तकनीक बताया है।
मोबाइल नेटवर्क पर भी कम हो सकता है दबाव
D2M का एक बड़ा फायदा मोबाइल नेटवर्क पर पड़ने वाला दबाव कम करना हो सकता है।
मान लीजिए किसी बड़े क्रिकेट मैच या बड़ी खबर को करोड़ों लोग एक साथ मोबाइल पर लाइव देख रहे हैं। इंटरनेट के जरिए ऐसा होने पर बड़ी मात्रा में डेटा ट्रैफिक मोबाइल नेटवर्क पर आता है।
D2M मॉडल में एक ही ब्रॉडकास्ट सिग्नल को बड़ी संख्या में compatible devices रिसीव कर सकते हैं। इससे खास तौर पर बड़े लाइव इवेंट के दौरान मोबाइल नेटवर्क पर डेटा ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
आपदा के समय भी उपयोगी
D2M की सबसे महत्वपूर्ण संभावनाओं में से एक emergency communication है।
बाढ़, चक्रवात, भूकंप या अन्य आपदा की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों तक जरूरी सूचना तेजी से पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। D2M जैसे broadcast-based सिस्टम में एक ही सूचना को बड़े क्षेत्र में मौजूद compatible devices तक पहुंचाने की क्षमता हो सकती है।
सरकार ने भी D2M को critical और disaster-management alerts के लिए संभावित रूप से उपयोगी बताया है।
हालांकि, मोबाइल आपदा अलर्ट के लिए भारत में Cell Broadcast आधारित अलग व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। इसलिए D2M और Cell Broadcast को एक ही तकनीक समझना सही नहीं होगा।
भारत में कई साल से चल रहा है काम
D2M कोई अचानक सामने आई तकनीक नहीं है। भारत में इस पर कई वर्षों से काम चल रहा है।
प्रसार भारती ने IIT कानपुर के साथ मिलकर Next Generation Broadcast और D2M से जुड़े समाधान विकसित करने की दिशा में काम किया है। 2022 में IIT कानपुर, प्रसार भारती और अन्य संस्थानों से जुड़े कार्यक्रम में स्मार्टफोन पर D2M तकनीक का प्रदर्शन भी किया गया था।
इसके बाद प्रसार भारती ने D2M तकनीक के परीक्षण और मूल्यांकन का काम आगे बढ़ाया। 2024 में सरकार ने बताया था कि प्रसार भारती, IIT कानपुर और Saankhya Labs के साथ मिलकर D2M के हाई-पावर और लो-पावर ट्रांसमीटरों का परीक्षण कर रहा है।
हाल ही में प्रसार भारती ने D2M तकनीक के 470-582 MHz frequency range में परीक्षणों से जुड़े दस्तावेज भी जारी किए हैं। इनमें मोबाइल डिवाइस पर संभावित interference और heating जैसे तकनीकी पहलुओं का परीक्षण शामिल था।
अब क्या होने वाला है?
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक अगला बड़ा कदम D2M के कमर्शियल रोलआउट के लिए कंपनियों का चयन और RFP प्रक्रिया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि अगले ही दिन से देश के सभी मोबाइल फोन पर बिना इंटरनेट टीवी चलने लगेगा। इसके लिए ब्रॉडकास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी मानक, compatible devices, कंटेंट और व्यावसायिक मॉडल जैसे कई पहलुओं को अंतिम रूप देना होगा।
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?
अगर D2M बड़े स्तर पर लागू होता है, तो मोबाइल पर लाइव टीवी देखने का एक ऐसा विकल्प सामने आएगा जो मोबाइल डेटा पर निर्भर नहीं होगा।
खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर हो सकती है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। वहीं बड़े खेल आयोजनों और लाइव न्यूज के दौरान नेटवर्क पर डेटा ट्रैफिक कम करने की संभावना भी इसका अहम फायदा हो सकती है।
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