दिल्ली
आज राहुल गांधी का आचरण पूरी तरह से अशोभनीय और निंदनीय रहा। नेता प्रतिपक्ष जैसा गरिमामय पद होने के बावजूद राहुल गांधी उसे गंभीरता से नहीं लेते हैं, यह आज उनके व्यवहार से स्पष्ट हुआ है।
लोकतंत्र में विरोध और अराजकता अलग-अलग बातें हैं। विरोध जब मर्यादा की सीमाओं को पार कर जाता है, तो वह अराजकता का रूप ले लेता है। आज प्रधानमंत्री जी के आवास पर जाकर जिस प्रकार राहुल गांधी और उनकी टीम ने अराजकता फैलाने का प्रयास किया, वह स्पष्ट संदेश देता है कि वे विरोध की राजनीति नहीं, बल्कि अराजकतावादी राजनीति के परिचायक बनते जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने जिन मुद्दों पर चर्चा की शर्त रखी, उन्हें भी स्वीकार किया गया। लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि नेता प्रतिपक्ष जैसे पद पर बैठा व्यक्ति अपने ही उठाए हुए विषयों से पीछे हट गया। इससे उनकी अपरिपक्वता स्पष्ट रूप से झलकती है।
विपक्ष के साथ संसद के पटल पर हर प्रकार का संवाद स्वीकार्य है, लेकिन इस प्रकार का व्यवहार देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
Author Profile

Latest entries
छत्तीसगढ़2026.11.04जनादेश का सम्मान लोकतंत्र की पहली शर्त..हारने पर ईवीएम को दोष देना कांग्रेस की दोहरी राजनीति : अजय चंद्राकर
छत्तीसगढ़2026.11.03बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला करेंगे रेडक्रॉस मेडिकल शॉप एवं प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र का शुभारंभ
छत्तीसगढ़2026.11.03सहकारी समितियों के कर्मचारियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 4 एवं 5 नवंबर को
रायपुर2026.11.03केदारनाथ गुप्ता बने छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष..शिव नारायण पाण्डेय को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
