मध्य प्रदेश के कटनी जिले में 11.95 किमी लंबी स्लीमनाबाद टनल का काम पूरा हो गया है। बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट का हिस्सा यह टनल नर्मदा नदी का पानी प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) के जरिए बिना किसी पंपिंग के सोन बेसिन तक ले जाएगी। ₹1,600+ करोड़ की यह परियोजना विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगी。आइए इस ऐतिहासिक और तकनीकी रूप से अनोखी परियोजना की मुख्य बातों पर नज़र डालते हैं:1. आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरणगुरुत्वाकर्षण (Gravity Flow) आधारित: सुरंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पानी को बिना किसी पंप या लिफ्ट के पूरी तरह से प्राकृतिक ढलान के माध्यम से एक बेसिन से दूसरे बेसिन में स्थानांतरित करेगी।लंबाई और क्षमता: इस सुरंग की कुल लंबाई लगभग 11.95 किलोमीटर (11.952 किमी) है और इसका व्यास 10.14 मीटर है। यह राज्य की सबसे ज्यादा क्षमता वाली टनल है जिसकी जल निकासी क्षमता 227 क्यूमेक है。2. इस परियोजना से होने वाले लाभसिंचाई क्षमता: इस टनल के माध्यम से छोड़े जाने वाले पानी से 6 ज़िलों—जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और रीवा के लगभग 1,450 गांवों में 2.45 लाख हेक्टेयर ज़मीन को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा。पेयजल और उद्योग: खेती में क्रांतिकारी बदलाव के अलावा, यह जबलपुर और कटनी क्षेत्रों में पीने के पानी और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में भी सहायता करेगी。जल सुरक्षा: सूखाग्रस्त विंध्य क्षेत्र में साल भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी。3. इतिहास और चुनौतियांइस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य 2011 में शुरू किया गया था。 विंध्य की कठोर चट्टानों और कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण इसे पूरा होने में लंबा समय लगा।निर्माण के दौरान तकनीकी चुनौतियों और देरी के कारण इस परियोजना की लागत मूल अनुमानित बजट (लगभग ₹799 करोड़) से बढ़कर ₹1,500 – ₹1,600 करोड़ के पार पहुंच गई。
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