हेली लिंगः लेफ्ट इकोसिस्टम का नया सितारा और टूलकिट का खेल

हेली लिंगः लेफ्ट इकोसिस्टम का नया सितारा और टूलकिट का खेल

बिलासपुर /

/चोक्खा गोठ

/अखिल पांडे

इन दिनों नार्वे की पत्रकार हेली लिंग और काकरोच जनता पार्टी की सोशल मीडिया में जमकर चर्चा है। दोनों ही घटनाओं को लेकर जो खबरें आ रही है उसके तह तक पहुंचने की कोशिश देखने नहीं मिली है। खासकर नार्वे की पत्रकार हेली जिसकी कुछ सौ फॉलोअर्स थी, वह अचानक लोकप्रिय कैसे हो गई। इसके लिए पूरा इकोसिस्टम कैसे काम किया, यह खोजबीन कर आपके पास रख रहा हूं।

हेली लिंग (Helle Lyng Svendsen या Helle Lyng) नॉर्वे की पत्रकार हैं, जो Oslo-based अखबार Dagsavisen से जुड़ी हैं। यह अखबार पूरी तरह से लेफ्ट लिबरल है। हेली लिंग अपने पूर्व के एक्स एकाऊंट में पोस्ट उन्होंने मई 2026 में PM नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा (Oslo) के दौरान वायरल घटना में चर्चा पाई।
घटना क्या हुई? PM मोदी और नॉर्वे के PM Jonas Gahr Store के संयुक्त प्रेस स्टेटमेंट के बाद, जब दोनों नेता जा रहे थे, तब Helle Lyng ने शोर मचाते हुए सवाल पूछा: “Prime Minister Modi, why don’t you take some questions from the freest press in the world?” (नॉर्वे World Press Freedom Index में नंबर 1 है, भारत 157वें स्थान पर है, इसका इशारा था)। PM मोदी ने जवाब दिए बिना आगे बढ़ गए। इस वीडियो को हेली ने एक्स पर पोस्ट कर दिया। इस पोस्ट को भाजपा नेता(शायद अभी भाजपा में हैं) सुब्रमण्यम स्वामी की बेटी सुहासिनी हैदर ने रीट्वीट किया। यह द हिन्दू में काम करती है और कट्टर हिन्दू विरोधी है जबकि द हिन्दू अखबार के बारे में आप जानते ही होंगे। सुहासिनी के रीट्वीट करते ही पूरी लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम एक्टिव हो गया। लेकिन इस बीच विदेश मंत्रालय ने इस ट्वीट का जवाब देकर बड़ी गलती कर दी। जिसमें Indian Embassy ने उन्हें MEA briefing के लिए आमंत्रित किया, जहां उन्होंने सवाल किया कि, “ क्या आप हमें भरोसा दिला सकते हैं कि आप मुसलमानों पर जुल्म करना बंद कर देंगे ” MEA Secretary (West) Sibi George ने भारत के rule of law व लोकतंत्र की बात की। यह एक्सचेंज भी वायरल हुआ। लेकिन सवाल किस बकवास है कि कोई यह पूछे कि “आपने अपनी पत्नी को प्रताड़ित करना बंद कर दिया क्या“ अब इस सवाल का क्या जवाब हो सकता है। यानी आप हां कहें तो मुश्किल और न कहें तो मुश्किल। यानी इस बकवास सवाल का आखिर क्या जवाब। इसके बाद हेली ने प्रेस ब्रिफिंग से वाक आऊट कर गई। और यह वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो गया।

सोशल मीडिया पर वायरल और फॉलोअर्स

  • घटना से पहले उनकी X (Twitter) पर कुछ सौ (लगभग 8 सौ) फॉलोअर्स थे, अकाउंट inactive था (2024 से पोस्ट नहीं)। घटना के 1-2 दिन में फॉलोअर्स 87 हजार तक पहुंच गया। जबकि Instagram और Facebook अकाउंट सस्पेंड हो गए (backlash/trolling के कारण)। उन्होंने खुद पोस्ट किया कि यह “press freedom की छोटी कीमत” है। बात यह नहींं रुकती है। इसके बाद राहुल गांधी ने हेली के वीडियो पोस्ट को शेयर किया और कहा कि, PM “panicking” और “running away” हैं। Helle Lyng ने Rahul Gandhi को रिप्लाई करते हुए phone interview की रिक्वेस्ट की: “Hello, would you be available for a phone interview on Tuesday Norwegian time?” इसके बाद राहुल गांधी ने फोन पर इंटरव्यू भी दिया। और फिर यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया। इसके बाद कुछ लोगों ने हेली का इंटरव्यू लेना शुरू कर दिया। इसमें बामसेफ के लोग भी शामिल हैं। इस खबर को बीबीसी ने प्रमुखता से लिखा और इस इकोसिस्टम से जुड़े लोग लगातार शेयर करते रहे।
    कहने का अर्थ है कि पूरे विश्व में जिस तरह से लेफ्ट इकोसिस्टम का मायाजाल किस तरह से फैला है यह देखने वाली बात है। किसी झूठ को किस तरह से सच बताया जाता है, यह सोचने वाली बात है। सुब्रमण्यम स्वामी जो कट्टर हिंदुत्व के पैरोकार बनते हैं, उनकी बेटी सुहासिनी हैदर ठीक उलट काम करती है। प्रेस फ्रीडम में भारत को 157 वें नम्बर पर रखा गया है जिसमें फिलिस्तीन, पाकिस्तान, यूएई से भी नीचे भारत को रखा गया है।

यह वह पत्रकार है जो अपने एक्स में सी जिनपिंग को सुपर हीरो बोल रही है और डोनाल्ड ट्रंप को गाली दे रही है। चीन में प्रेस स्वतंत्रता की क्या स्थिति है यह क्या लोगों को नहीं मालूम है, फिर भी वही एजेंडा चला रही है कि जहां पर पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया जा रहा है और उस देश का प्रेस फ्रीडम इंडेक्स टॉप पर है तो इस पर सवाल करती। लेकिन टूल किट का हिस्सा बनकर जो सवाल खड़े किए जा रहे हैं, उससे यह साफ समझ में आता है कि जिस तरह से रवीश कुमार, राजदीप, बरखा दत्त जैसे एंजेडा वाले पत्रकार हैं, जिन्हें केवल और केवल मोदी विरोध के अलावा कुछ समझ में नहीं आता, उस तरह की पत्रकारिता का हिस्सा हेली लिंग है।

कुल मिलाकर, एक छोटे अखबार की पत्रकार, जिनके कुछ सौ फॉलोअर्स थे, अचानक वैश्विक चर्चा में आ गईं। सुहासिनी हैदर के रीट्वीट से शुरू होकर राहुल गांधी तक पहुंचने वाला यह पूरा सिलसिला लेफ्ट इकोसिस्टम की कार्यशैली को उजागर करता है। यह दर्शाता है कि कैसे छोटी-छोटी घटनाओं को बड़े राजनीतिक हथियार में बदला जा सकता है।

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