महादेव बुक के नाम से खुलेआम चल रही ऑनलाइन सट्टा माफिया!

महादेव बुक के नाम से खुलेआम चल रही ऑनलाइन सट्टा माफिया!

अखिल पांडे

रायपुर, 9 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ की राजधानी समेत पूरे प्रदेश में महादेव बुक के नाम से ऑनलाइन सट्टेबाजी का धंधा सरे आम चल रहा है। सोशल मीडिया पर पिछले कई महीनों से रोज-रोज पोस्ट हो रहे हैं, IPL मैचों पर सट्टा लगाने के लुभावने ऐड्स आ रहे हैं, व्हाट्सएप-इंस्टाग्राम,फेसबुक में नंबर खुले घूम रहे हैं। आम नागरिक देख रहे हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन की आँखें बंद हैं। शिकायत करने पर अधिकारी लगातार “कार्रवाई करेंगे” का राग अलापते हैं, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं होता।

अब सवाल ये है – जब सोशल मीडिया पर खुलेआम गैरकानूनी सट्टा का प्रचार हो रहा है, तो छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर सेल स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेकर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? क्या FIR दर्ज न होने तक पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी?

जब हमने इस पूरे मामले की जाँच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। महादेव बुक के नाम से IPL 2026 के मैचों को लेकर लगातार पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें साफ-साफ सट्टा लगाने के नंबर दिए जा रहे हैं। युवा, नौजवान, छोटे-छोटे दुकानदार – सब इस जाल में फंस रहे हैं।

जब इसकी शिकायत छत्तीसगढ़ स्टेट साइबर सेल और रायपुर कमिश्नरेट के साइबर अपराध प्रमुख समृतिक राजनाला से की गई, तो उनका एक ही जवाब था – “कोई FIR दर्ज नहीं है, इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही है।”

और जब पूछा गया कि सोशल मीडिया पर खुलेआम ऐड्स चल रहे हैं, तो स्वतः संज्ञान क्यों नहीं ले रहे?
तो अधिकारी का जवाब था – “चलिए, मैं देख रहा हूँ।”

आईजी जी.एस. जायसवाल स्टेट साइबर प्रमुख से भी जब बात की गई, तो उन्होंने भी यही रुख अपनाया। कोई ठोस कार्रवाई का आश्वासन नहीं, सिर्फ़ “देख रहे हैं” वाला फॉर्मूला दोहराया ।

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महादेव बुक सट्टा कैसे चलता है?
ये सट्टा ऑनलाइन चलता है। लोग घर बैठे IPL मैच देखते हुए पैसे लगा सकते हैं। लेकिन ये पूरी तरह गैरकानूनी है। फिर भी कुछ लोग इसे चला रहे हैं।

स्टेप-बाय-स्टेप आसान तरीका:
सोशल मीडिया पर ऐड देखना IPL मैच के समय फेसबुक, इंस्टाग्राम, X (ट्विटर) या व्हाट्सएप पर पोस्ट आता है। लिखा होता है: “GT vs DC मैच में बड़ा जीत का मौका! Mahadev Book पर सट्टा लगाओ, पैसे कमाओ। जल्दी ID ले लो।” मैच की फोटो या वीडियो लगी होती है। नीचे “Get ID Now” या लिंक होता है।
ID बनवाना (रजिस्ट्रेशन) लिंक पर क्लिक करो → व्हाट्सएप खुल जाता है। वहाँ कोई एजेंट (दलाल) बात करता है। वो कहता है: “भाई, 200-300 रुपये भेज दो, मैं तुम्हें ID और पासवर्ड दे दूँगा।” तुम UPI से पैसे भेजते हो (PhonePe, Google Pay आदि)। 2-5 मिनट में तुम्हें यूजरनेम और पासवर्ड मिल जाता है। ये Mahadev Book नाम की वेबसाइट या ऐप है।
पैसे डालना (Deposit) ID से लॉगिन करो। “Deposit” बटन दबाओ। फिर UPI या बैंक से 500, 1000, 5000 रुपये डाल दो। पैसे तुरंत अकाउंट में दिख जाते हैं। कभी-कभी “पहली बार 100% बोनस” का लालच भी देते हैं (जैसे 1000 डालो तो 2000 मिले)।
सट्टा लगाना (Betting) IPL मैच चुनो। अब कई तरह के सट्टे होते हैं:
मैच कौन जीतेगा?
टॉस कौन जीतेगा?
कोई खिलाड़ी कितने रन बनाएगा?
कुल रन कितने होंगे?
मैच के बीच में भी लाइव सट्टा (जैसे अगला ओवर कितने रन?) तुम अपनी रकम चुनो और “Place Bet” दबा दो। ऑड्स (भाव) दिखते हैं – जैसे 1.8 या 2.5। अगर जीते तो उतना गुना पैसा मिल सकता है।
जीत-हार और पैसे निकालना (Withdraw) अगर जीत गए तो “Withdraw” में जाकर UPI पर पैसे माँग लो। कुछ घंटे में पैसे आ जाते हैं (दावा करते हैं)। लेकिन ज्यादातर लोग हार जाते हैं। फिर एजेंट कहता है – “फिर ट्राई करो, बोनस मिलेगा।” इस तरह लोग बार-बार पैसे डालते रहते हैं।
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कमजोर कानून

सट्टा खिलाने वालों पर पुलिस कार्रवाई होती है,लेकिन कमजोर कानून की वजह से कुछ माह में ही लोग जेल से रिहा हो जाते हैं। लेकिन फिर भी लोग इस धंधे से अपना हाथ नहीं खींचते। दरअसल, मामला ऐसा है कि, इस खेल में करोड़ों रुपये की कमाई है। जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक के लोग शामिल हैं। बताया जाता है कि आईपीएल मैच के दौरान ही खाईवाल, पुलिस, सफेद पोस वालों तक इतने रुपये आ जाते हैं जिससे कोई भी इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई पर विचार नहीं किया जाता। अब कार्रवाई होती भी है तो कुछ माह के लिए खाईवाल को जेल हो जाती है। ऐसी बात सामने आई है कि सट्टा-पट्टी लिखने वाले अधिकांश बाहरी होते हैं। करोड़ों कमाने के बाद अपनी जगह बदल देते हैं। इससे होता यह है कि जेल होने के बाद वह मूल निवास पर चला जाता है जहां वह इज्जत के साथ रह सकता है। इस तरह से सट्टा का कारोबार चल रहा है। इसमें जेल जाने के लिए भी लोग तैयार हैं जिसमें अनाप-शनाप पैसा आता है। इन्हीं सब कारणों से सट्टा-पट्टी के मामले में नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। सोचने वाली बात यह है कि इस मामले में खाईवाल कहां-कहां तक राशि भेजते हैं यह आफ द रिकार्ड है।
सौरभ चंद्राकर मामले में यह साफ जाहिर होता है कि अब महादेव बुक में सही कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई है।

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