बिलासपुर /सीपत 26/03/2022
एनटीपीसी सीपत परियोजना का केवल 16 प्रतिशत बिजली छत्तीसगढ़ को मिलता है। शेष बिजली दूसरे राज्यों को मिलती है। वित्त वर्ष 2021-22 में 24 मार्च 2022 तक सीपत विद्युत गृह द्वारा 81. 58% पीएलएफ पर 20 887.2 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर पूरे एनटीपीसी में चौथा और पीएलएफ के मामले में छठा स्थान हासिल किया है। वर्तमान में सीपत एनटीपीसी को दीपिका के कोयला खदान से कोयले की आपूर्ति होती है और अभी हमारे यहां 13 दिन का कोयला स्टॉक में है। अगर कोयले की किल्लत होती है तो अन्य खदानों से भी कोयला लेने के लिए प्रयास किया जाएगा। हालांकि वर्ष 2020-21 के लिए एनटीपीसी सीपत को पूरे एनटीपीसी में निष्पादन मूल्यांकन के आधार पर प्रथम स्थान घोषित किया गया है।
NTPC सीपत परियोजना के महाप्रबंधक घनश्याम प्रजापति ने आज पत्रकारों को बताया कि सीपत परियोजना द्वारा उत्पादित 26% बिजली गुजरात और 27% महाराष्ट्र को मिलता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को 16-16 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति की जाती है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अब तक 11 लाख से भी ज्यादा पौधरोपण किया जा चुका है और इस वर्ष 52000 पेड़ लगाए जाएंगे।पौधरोपण का सर्वाइवल रेट 80% है। उन्होंने पावर प्लांट के राखड़ उत्सर्जन को लेकर उठाया जा रहे सवाल पर कहा कि अब प्लांट के अंदर से ही ट्रेन के माध्यम से राख बाहर भेजे जाने का निर्णय लिया गया है। आस-पास के गांव में राख के उड़ने से फसलों की क्षति होने की शिकायतों पर उन्होंने बताया कि टैंकर द्वारा पानी से राख पर पानी का छिड़काव कर उसे उड़ने से रोकने का प्रयास हमारे द्वारा किया जाता है। एनटीपीसी सीपत परियोजना के प्रारंभ होने से लेकर अब तक प्रभावित गांवों के किसानों को मुआवजा के साथ ही भू विस्थापितों नौकरी देने के सवाल पर जिला प्रशासन, भुविस्थापितों और एनटीपीसी के संयुक्त निर्णय के अनुसार अभी तक 424 लोगों को नौकरी दी गई है कुल 626 लोगों को नौकरी दिया जाना है जिसमें 41 लोगों को अगले माह समायोजित किया जाएगा। वही 154 पद अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व किया गया है।
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