हरिद्वार महाकुंभ का आगाज हो गया सोमवती अमावस्या के दिन नदी में स्नान, जप, दान और तप करना बेहद शुभ होता है..

हरिद्वार महाकुंभ का आगाज हो गया सोमवती अमावस्या के दिन नदी में स्नान, जप, दान और तप करना बेहद शुभ होता है..

हरिद्वार महाकुंभ क्यों है खास
जब मेष राशि में सूर्य तथा महाकुंभ राशि में बृहस्पति का प्रवेश होता है, तब हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है. यह संयोग 2021 में दिखाई दे रहा है, लेकिन 2022 में ऐसा कोई संयोग नहीं बनता नजर आ रहा है. इसी कारण अखाड़ा परिषद ने हरिद्वार महाकुंभ को 2021 में ही आयोजित किए जाने का फैसला लिया है. इससे पहले साल 2010 के धर्मनगरी में आयोजित महाकुंभ में लगभग तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान किया था.

हरिद्वार में अमृत स्नान का विशेष महत्व
हरिद्वार में अमृत स्नान करने का शुभ अवसर आ गया है. मान्यता है कि इस अवसर के लिए देवी-देवता, साधु-संत और हिंदू धर्म को मानने वाले 12 साल इंतजार करते हैं. पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को लेकर जब देवताओं और असुरों में छीनाझपटी होने लगी तो अमृत कलश से अमृत की कुछ बूंदें धरती पर चार स्थानों पर गिरी थी. जिनमें हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन शामिल हैं. जिन स्थानों पर अमृत की बूंदे गिरी थीं, उन चारों स्थानों पर प्रत्येक 12 साल के बाद विशिष्ट ग्रह योग में महाकुंभ का आयोजन होता है.

दो शाही स्नान चुनौतीपूर्ण
12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या और 14 अप्रैल को मेष सक्रांति और बैशाखी का शाही स्नान है. जबकि 13 अप्रैल को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का पर्व स्नान है. इसलिए तीनों दिन भीड़ उमड़नी तय है. पिछली बार के महाकुंभ में बैशाखी के स्नान पर एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु स्नान करने आए थे.

इंतजाम किए गए हैं.

देहरादून : हरिद्वार महाकुंभ का आगाज हो गया है. महाकुंभ 30 अप्रैल तक चलेगा. महाकुंभ मेले की दिव्यता और भव्यता के लिए हरिद्वार में खास इंतजाम किए गए हैं. कोरोना वायरस की वजह से महाकुंभ को लेकर शासन और प्रशासन सख्त नजर आ रही है. कोरोना के बीच भीड़ को नियंत्रित करते हुए नियमों का पालन करना उत्तराखंड पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा.

शाही स्नान की तारीख

  1. 11 मार्च महाशिवरात्रि
  2. 12 अप्रैल, सोमवती अमावस्या का स्नान
  3. 14 अप्रैल मेष संक्रांति और बैसाखी
  4. 27 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा के दिन

सोमवती अमावस्या पर बन रहा विशेष संयोग
ज्योतिष शास्त्र में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार, सोमवार के दिन अमावस्या पड़ना बेहद शुभ माना जाता है. सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है. इस दिन नदी में स्नान, जप, दान और तप करना बेहद शुभ होता है.

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