
बिलासपुर 22/10/021
श्री विहार सरकंडा में गौरहा परिवार द्वारा श्रीमद्भागवत भागवत कथा का वाचन श्री अनिल शुक्ला महराज जी के मुखारबिंद से आज शुक्रवार को 6वा रोज सुदामा चरित्र के बारे में बताया गया।जिसमें गुरु माता ने इन्ह चना देकर कहा कि जाओ भूख लगे तो खा लेना और जंगल से लकड़ी ले आओ। यह लोग लकड़ी बीनने के लिए चल दिए कृष्ण पेड़ पर चढ़कर जब लकड़ी तोड़ रहे थे तो सुदामा चने को अकेले ही खाने लगे कृष्ण कटकटाने की आवाज सुनकर पूछते हैं चना खा रहे हो क्या सुदामा? तो सुदामा कहते हैं की ठंड के कारण दांत कटकटा रहे हैं।

इसके बाद बड़े होने पर सुदामा का जीवन गरीबी और विपन्नता में बितता है और कृष्ण द्वारका के राजा बन जाते हैं तब सुदामा की पत्नी कहती हैं की आपके मित्र राजा हैं सहायता के लिए उनके पास जाओ सुदामा जाते हैं दोनों मित्र बड़े ही प्रेम से एक दूसरे के गले मिलते हैं । कृष्ण पूछते हैं की भाभी ने हमें खाने के लिए कुछ दिया है क्या सुदामा कांख में चावल की पोटली को दबाने लगते हैं । उसके बाद भगवान कृष्ण उस पोटली को खींचकर खा जाते हैं। इस तरह मान सम्मान पाने के बाद जब सुदामा अपने गांव पहुँचते हैं तो देखते हैं गांव पूरी तरह भव्य नगर में बदल गया है। सबकी झोपड़ियां सुंदर महल में तब्दील हो गई हैं। इस तरह से कृष्ण अपने मित्र की गरीबी दूर करके मित्रता के सच्चे कर्तव्य को निभाते हैं। आज के कथा वाचन के श्रवण करने पूर्व महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमति हर्षिता पाण्डेय उपस्थित रही।
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