अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण में अंतरिक्ष वैज्ञानिको के तकनीकी का भी होगा इस्तेमाल।

भगवान शिव के भक्त मंदिर निर्माण के बाद सोने वाले रामनवमी पर गर्भगृह में भगवान श्री रामलला को स्पर्श करें। इसके लिए अंतरिक्ष के वैज्ञानिकों के तकनीकी को इस्तेमाल किया जाएगा। यह जानकारी राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के तीन दिवसीय बैठक के पहले दिन दिया। साथ ही राम मंदिर निर्माण के लिए की जा रही राफ्ट की ढलाई के लिए चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि तापमान न मिल से बड़ी मात्रा में बर्फ का प्रयोग किया जा रहा है।

तापमान के कारण राफ्ट निर्माण में आ रही बाधा

राम मंदिर को लेकर निर्माण समिति की बैठक के पहले दिन दो चरणों मे आयोजित किया गया। पहला चरण मंदिर परिसर में स्थलीय निरीक्षण के बाद परिसर स्थित विश्वामित्र आश्रम एलएन्डटी कार्यालय में किया गया जिसमें राफ्ट निर्माण के तकनीकी पर विचार हुआ। वहीं दूसरे चरण की बैठक सर्किट हाउस में किया गया। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने जानकारी देते हुए बताया कि आज तकनीकी और भविष्य की योजना को लेकर बातचीत किया गया है और परिसर में जो कार्य किया जा रहा है जल्द ही इस पूरे कार्य को मीडिया के सामने रात्रि के दौरान दिखाया जाएगा। बताया कि अब जितना भी कार्य होगा वह कम से कम 22, 23 डिग्री सेल्सियस के तापमान होना जरूरी है। वह रात्रि में ही मिल पाएगा। लेकिन अभी भी रात्रि का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। जिसके कारण राफ्ट की ढलाई के लिए बर्फ का इस्तेमाल अधिक करना पड़ रहा है। इसलिए 23 डिग्री तापमान तक आने के लिए इंतजार करना चाहिए।

रामनवमी पर सूर्य किरण से प्रकाशमान होगा गर्भगृह

माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के सामने या विषय रखा है की प्रयास करो प्रति वर्ष रामनवमी के दिन दोपहर 12:00 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है उस दौरान सूर्य की किरण भगवान श्री राम लला के मुख्य को प्रकाशित करें और उसका दृश्य अयोध्या के सैकड़ों स्थानों सार्वजनिक स्थानों पर पर डिस्प्ले किया जाए अंतरिक्ष वैज्ञानिक ही यह कार्य कर सकते हैं उनका कार्य चल रहा है लेकिन अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के द्वारा अभी टिप्पणी नहीं आई है लेकिन उनका भरोसा है कि वह इस कार्य में सफल होंगे।

जय श्री राम 🙏🙏

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