Delimitation Bill: परिसीमन बिल पर सरकार ने खोले पत्ते, सरकार का दावा- कई दलों से हुई बात, कांग्रेस से नहीं मिला जवाब

Delimitation Bill: परिसीमन बिल पर सरकार ने खोले पत्ते, सरकार का दावा- कई दलों से हुई बात, कांग्रेस से नहीं मिला जवाब

परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों के साथ बातचीत की स्थिति पर अपना पक्ष रखा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कांग्रेस अध्यक्ष की चिट्ठी का दो पन्नों में जवाब देते हुए दावा किया कि सरकार ने इस मुद्दे पर कई राजनीतिक दलों से संपर्क किया है। सरकार का कहना है कि बिल को व्यापक समर्थन दिलाने और संसद में दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए विभिन्न दलों के साथ बातचीत की कोशिश की जा रही है।

सपा और DMK से बातचीत का दावा

सरकार की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक, परिसीमन के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) से बातचीत हुई है। समाजवादी पार्टी का नेतृत्व अखिलेश यादव कर रहे हैं, जबकि DMK तमिलनाडु की प्रमुख राजनीतिक पार्टी है। सरकार का दावा है कि इन दलों के साथ बातचीत का उद्देश्य प्रस्तावित बिल पर सहमति बनाने की संभावनाओं को तलाशना है।

ओवैसी और उद्धव ठाकरे की पार्टी से भी संपर्क

सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि परिसीमन बिल को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले राजनीतिक दल से भी बातचीत की गई है। इसके अलावा नवीन पटनायक और जगन मोहन रेड्डी की पार्टियों के साथ बातचीत जारी होने की बात कही गई है। सरकार की कोशिश बताई जा रही है कि महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव से जुड़े इस बिल पर संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाया जाए।

कांग्रेस के जवाब का इंतजार: सरकार

कांग्रेस के साथ बातचीत को लेकर सरकार ने अलग रुख सामने रखा है। किरेन रिजीजू के जवाब के मुताबिक, सरकार की ओर से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कांग्रेस ने अब तक बातचीत के लिए कोई तारीख या अपने प्रतिनिधि का नाम नहीं बताया है। सरकार का दावा है कि कांग्रेस की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है।

दो-तिहाई बहुमत जुटाने की चुनौती

परिसीमन बिल को संसद में दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए सरकार को राजनीतिक समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में अलग-अलग दलों से बातचीत को अहम माना जा रहा है। हालांकि, बिल के अंतिम स्वरूप, उसके प्रावधानों और विभिन्न राजनीतिक दलों की औपचारिक प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट होगा कि इस मुद्दे पर सहमति कितनी बन पाती है। फिलहाल सरकार और कांग्रेस के बीच संवाद को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच परिसीमन बिल पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

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