सिर्फ ₹2 ज्यादा वसूलना पड़ा भारी! हाथरस के रेस्टोरेंट पर ₹1 लाख का जुर्माना, ग्राहक को भी मिलेगा मुआवजा

सिर्फ ₹2 ज्यादा वसूलना पड़ा भारी! हाथरस के रेस्टोरेंट पर ₹1 लाख का जुर्माना, ग्राहक को भी मिलेगा मुआवजा

सिर्फ ₹2 ज्यादा वसूलना पड़ा भारी! हाथरस के रेस्टोरेंट पर ₹1 लाख का जुर्माना, ग्राहक को भी मिलेगा मुआवजा
₹18 की पानी की बोतल के लिए वसूले ₹20 | उपभोक्ता आयोग ने माना अनुचित व्यापार व्यवहार, 45 दिन में आदेश का पालन करने के निर्देश

 

हाथरस/अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के हाथरस में पानी की बोतल पर निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से महज दो रुपये अधिक वसूलना एक रेस्टोरेंट को भारी पड़ गया। अलीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मामले में रेस्टोरेंट को उपभोक्ता कल्याण कोष में एक लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए ₹1,000 और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹5,000 देने के निर्देश दिए गए हैं।
यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों और कारोबारियों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 【जागरण की रिपोर्ट के अनुसार】, आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बोतल की निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार माना।
₹18 की बोतल का बिल बनाया ₹20
मामला 11 मार्च 2026 का है। रिपोर्ट के मुताबिक, अलीगढ़ निवासी अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल हाथरस स्थित बीबीसीएन रॉयल रेस्टोरेंट एंड पार्टी हॉल में खाना खाने गए थे। भोजन के दौरान पानी मांगने पर उन्हें टाटा कॉपर ब्रांड की पैकेज्ड पानी की बोतल दी गई।
बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य ₹18 अंकित था, लेकिन रेस्टोरेंट ने ग्राहक से इसके लिए ₹20 वसूल लिए। यानी ग्राहक से निर्धारित कीमत से दो रुपये अधिक लिए गए।
ग्राहक ने इस अतिरिक्त वसूली के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपनी शिकायत के समर्थन में बिल और पानी की बोतल की तस्वीर प्रस्तुत की। बिल में बोतल की कीमत ₹20 दर्ज थी, जबकि बोतल पर ₹18 का एमआरपी दिखाई दे रहा था।
रेस्टोरेंट ने नहीं रखा अपना पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान रेस्टोरेंट को नोटिस भेजे जाने के बावजूद उसकी ओर से आयोग के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद 21 मई 2026 को आयोग ने एकपक्षीय कार्यवाही आगे बढ़ाई।
आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। बिल और बोतल पर अंकित एमआरपी के बीच अंतर सामने आने के बाद आयोग ने माना कि रेस्टोरेंट ने निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलकर अनुचित व्यापार व्यवहार किया।
₹1 लाख उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने का आदेश
आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने रेस्टोरेंट संचालक को निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया:
₹1,00,000: उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने के लिए।
₹1,000: शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के मुआवजे के रूप में।
₹5,000: शिकायतकर्ता को मुकदमे के खर्च के रूप में।
इस तरह शिकायतकर्ता को कुल ₹6,000 मिलेंगे, जबकि एक लाख रुपये उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा किए जाएंगे। आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन की समय-सीमा निर्धारित की है। आदेश का पालन नहीं करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है इस फैसले का संदेश?
यह मामला बताता है कि उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन होने पर शिकायत केवल इसलिए बेकार नहीं हो जाती कि अतिरिक्त वसूली की रकम छोटी है। हालांकि, हर छोटे विवाद में एक लाख रुपये का जुर्माना लगना तय नहीं है; दंड मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और आयोग के आदेश पर निर्भर करता है।
ग्राहकों को पैकेज्ड वस्तुओं की खरीदारी करते समय बिल और उत्पाद पर अंकित एमआरपी की जांच करनी चाहिए। यदि उनसे निर्धारित एमआरपी से अधिक राशि वसूली जाती है, तो वे बिल, भुगतान का प्रमाण और उत्पाद की तस्वीर सुरक्षित रखकर शिकायत कर सकते हैं।
निष्कर्ष: पानी की बोतल पर सिर्फ दो रुपये की अतिरिक्त वसूली से शुरू हुआ यह विवाद रेस्टोरेंट के लिए एक लाख रुपये के आदेश तक पहुंच गया। मामले का सबसे बड़ा संदेश यही है कि उपभोक्ता के अधिकारों की अनदेखी करना कारोबारियों को महंगा पड़ सकता है।

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abhijeet pandey
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