Nobel Peace Prize 2026: भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला शांति का नोबेल पुरस्कार

Nobel Peace Prize 2026: भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला शांति का नोबेल पुरस्कार

नई दिल्ली। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद और मानवाधिकार विशेषज्ञ नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार को उनके नाम की घोषणा की। नवी पिल्लई को शांति, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके लंबे योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया है। तमिल मूल के परिवार में जन्मीं पिल्लई ने रंगभेद के दौर में भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रंगभेद के दौर में शुरू हुई संघर्ष की कहानी

नवी पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनका परिवार तमिल मूल का था। ऐसे दौर में जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की व्यवस्था के कारण अश्वेत लोगों को समान अधिकारों और अवसरों से वंचित रखा जाता था, पिल्लई ने कानून को अपने संघर्ष का माध्यम बनाया।

कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 1967 में वकालत शुरू की। वह नटाल प्रांत में स्वतंत्र कानूनी प्रैक्टिस शुरू करने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं। अपने शुरुआती करियर में उन्होंने उन लोगों के अधिकारों की पैरवी की, जिनकी आवाज रंगभेद की व्यवस्था में दबा दी जाती थी।

भेदभाव के खिलाफ आवाज से अंतरराष्ट्रीय न्याय तक

नवी पिल्लई का काम केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया। उनके करियर में कानून के माध्यम से भेदभाव का विरोध करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोशिश प्रमुख रही।

उनकी यात्रा यह दिखाती है कि सामाजिक असमानता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष में कानूनी संस्थाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन में समानता, मानव गरिमा और जवाबदेही जैसे सिद्धांतों को केंद्र में रखा।

शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून में योगदान को मिला सम्मान

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नवी पिल्लई का चयन उनके लंबे कानूनी और मानवाधिकार संबंधी योगदान को वैश्विक मान्यता देता है। उनका जीवन रंगभेद के खिलाफ संघर्ष से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने तक पहुंचा है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *