
बिलासपुर।नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने जनसंघ के संस्थापक डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 120वीं जयंती में बोदरी व पथरिया मंडल के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने उनके स्मंरण में अपने निवास ग्राम परसदा में पौध रोणप किया। उन्होंने इस मौके आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्र को एक सूत्र बनाने के लिये अपनों प्राणों आहूति लगा दी। उनके लिये हमेशा राष्ट्र प्रथम था। उन्होंने एक निशान, एक विधान,एक प्रधान का सपना हम सबके लिये समग्रता के लिये देखा था। उस पुनीत कार्य को गति देने का कार्य देश के कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जुटे हैं।

डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी पहले व्यक्ति थे जिन्होंने उस समय में जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का विरोध किया था और इस कारण वे जेल गए थे, जहां संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मौत हो गयी। उन्होंने धारा 370 को लेकर जो संकल्प लिया था। उसे प्रधानमंत्री मोदी जी व गृहमंत्री अमित शाह ने एक मजबूत संकल्प के साथ पूरा किया है। उन्होंने कहा कि हमारे पूरखों ने जो सपना देखा था। उस पूरा करने के दिशा में हम लगातार अग्रसर है। उनका जन्म कलकत्ता में 6 जुलाई 1901 को बंगाल के उच्च प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी महान अकादमिक और बैरिस्टर थे।उनकी माता जोगमाया देवी भी एक विदुषी महिलाओं में थी। ड़ॉ.श्माया प्रसाद मुखर्जी के जीवन में परिवार के संस्कारों का अधिक प्रभाव था। यही कारण था कि वह हमेशा राष्ट्र के प्रगति के लिये अपने जीवन को समर्पित कर दिया था। वह केवल 33 साल के आयु में कलकता विश्वविद्यालय के युवा कुलपति बनने का रिकार्ड उनके नाम है।

नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि श्यामा प्रसाद मखर्जी ने एक-एक संकल्प को पूर्ण करने के लिये हम संकल्पवान है। उन्होंने जो हमारे अधिकारों के लिये जो वैचारिक संगठन की स्थापना की है। हम उस पवित्र संगठन के सदस्य है। जो हम सबके लिये गौरव विषय है। उन्होंने राष्ट्रवाद की विचारधारा को राष्ट्रीय अखंडता के मूलमंत्र बताया था। जिस दिशा में हमारा संगठन और हम गतिमान है। उन्होंने कहा कि उनके संघर्ष के कारण के कारण ही हमारा संगठन विशाल और मजबूत है। उसे और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी हम सब कार्यकर्ताओं की है। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कार्यकर्ताओं से अपील करते कहा कि हम ड़ॉ. श्माया प्रसाद मुखर्जी को समाज के सर्व वर्ग में पंहुचाने के दिशा में और अधिक कार्य करने जरूरत है।
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