रायपुर,
29 अप्रैल 2026
अखिल पांडे
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति शुरू हो गई है। अटल आरोग्य लैब योजना अब पूरे प्रदेश में तेज गति से फैल रही है। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, इस योजना की प्रगति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और अमले को साफ निर्देश दिया है कि एक माह के अंदर राज्य के सभी 33 जिलों में इस योजना को पूर्ण रूप से लागू कर आम जनता को फ्री जांच की सुविधा उपलब्ध करा दी जाए।
यह योजना अप्रैल 2026 में बस्तर संभाग के सुकमा जिले से राज्यस्तरीय शुभारंभ के साथ शुरू हुई। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की उपस्थिति में जगदलपुर के महारानी अस्पताल सहित कई स्थानों पर पहली लैब का उद्घाटन किया गया। HLL Lifecare Limited (केंद्र सरकार की PSU) के सहयोग से “हमर लैब” को अपग्रेड कर अटल आरोग्य लैब बनाया जा रहा है। योजना का मुख्य लक्ष्य दूरदराज, आदिवासी और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाएं बिना किसी आर्थिक बोझ के उपलब्ध कराना है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
कवरेज: पूरे राज्य के 1046 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में लैब नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। इसमें जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) शामिल हैं।
फ्री टेस्ट की संख्या (स्तर के अनुसार):
जिला अस्पतालों में: 133-134 प्रकार के टेस्ट
सिविल अस्पतालों में: 111 प्रकार
CHC में: 97 प्रकार
PHC में: 64 प्रकार
टेक्नोलॉजी: जांच रिपोर्ट SMS और WhatsApp के माध्यम से सीधे मरीज के मोबाइल पर भेजी जाएगी। इससे समय की बचत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
फोकस क्षेत्र: बस्तर संभाग को प्राथमिकता दी गई है, जहां पहले चरण में तेज प्रगति हुई है। अब रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभागों में चरणबद्ध विस्तार चल रहा है।
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने हालिया समीक्षा बैठक में कहा, “अटल आरोग्य लैब मुख्यमंत्री जी की प्राथमिकता है। हमारा लक्ष्य है कि मई अंत तक तक पूरे प्रदेश में यह सुविधा पूरी तरह क्रियान्वित हो जाए। उपकरणों की स्थापना, स्टाफ की ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और क्वालिटी कंट्रोल में कोई देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एक केंद्रीय मॉनिटरिंग डैशबोर्ड भी स्थापित किया जा रहा है, जिससे रीयल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी।”
योजना की प्रगति और चुनौतियां
शुभारंभ के मात्र दो सप्ताह बाद ही बस्तर क्षेत्र में कई लैब सक्रिय हो चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उपकरण लगाने और स्टाफ प्रशिक्षण का काम तेज गति से चल रहा है। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं — जैसे दूरदराज क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट की उपलब्धता, प्रशिक्षित तकनीशियनों की कमी और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट। सचिव कटारिया ने इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि, एचएलएल जो इस लैब को संचालित करेगा वह स्टाफ की कमी पूरा करने का काम करेगा।
प्राइवेट अस्पतालों और लैबों पर संभावित असर
यह योजना सरकारी क्षेत्र को मजबूत करने के साथ-साथ प्राइवेट स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी प्रभाव डालेगी। छत्तीसगढ़ में हजारों प्राइवेट पैथोलॉजी लैब और अस्पताल हैं, जहां आम लोग महंगे टेस्ट करवाते थे। अब जब सरकारी अस्पतालों में 64 से 134 प्रकार के टेस्ट पूरी तरह फ्री हो जाएंगे, तो निम्न और मध्यम वर्ग के मरीजों का रुझान सरकारी लैबों की ओर बढ़ेगा। हालांकि इसके नकारात्मक प्रभाव भी है क्योंकि प्राइवेट लैबों की आय में कमी होने खासकर रूटीन ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी, एक्स-रे और बेसिक पैथोलॉजी जांचों में। कुछ छोटे-मध्यम प्राइवेट लैब्स को बंद करने या कर्मचारियों की छंटनी का सामना करना पड़ सकता है। बड़े प्राइवेट अस्पताल भी अपने डायग्नोस्टिक विभाग से कमाई कम होने की आशंका जता रहे हैं। लेकिन इस सब में आम लोगों को न केवल फायदा है बल्कि प्रायवेट अस्पतालों में जांच के नाम पर लूट मची थी वह करीब खत्म हो जाएगी। लेकिन दूसरी तरफ यह भी बात सामने आ रही है कि,प्राइवेट क्षेत्र को गुणवत्ता सुधारने और स्पेशलाइज्ड/एडवांस टेस्ट (जैसे हाई-एंड MRI, CT स्कैन, जेनेटिक टेस्टिंग) पर फोकस करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जहां सरकारी सुविधा अभी सीमित है। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कुल मिलाकर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और किफायतीपन में सुधार हो सकता है। लेकिन इस सब में इस बात की बड़ी आशंका है कि कुछ प्राइवेट लैब HLL या सरकार के साथ PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल में शामिल होकर नए गठजोड़ कर सरकारी खजाने पर बुरी नियत लगाए बैठे हैं। फिर भी स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग ने इस योजना के बारे में कहा कि मरीजों के खर्च को कम करेगी और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत) के साथ मिलकर बेहतर परिणाम देगी।
गृह के साथ स्वास्थ्य विभाग की बदल रही छवि
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि बस्तर संभाग के तीन जिलों में यह योजना मूर्त रूप ले लिया है बाकी जिलों में तेजी से काम किया जा रहा है। यहां दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधा काफी कम मिलता है। ऐसे में यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि, शुरुआत जरुर बस्तर से की गई है लेकिन पूरे प्रदेश में इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। इस योजना में तेजी आने से एक तरह से स्वास्थ्य विभाग की छवि अब बदल रही है। जैसा कि मालूम हो कि, प्रदेश के गृह और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी लेने से लोग कतराते थे। लेकिन नक्सल समस्या के अंतिम चरण के साथ गृह विभाग की छवि तेजी से बदल गई है। अब पुलिस की आक्रामक रणनीति से नक्सली हथियार डाल रहे हैं। इधर प्राइवेट अस्पतालों में प्रदेश में अनाप-शनाप लूट और सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग की छवि साफ सुथरी नहीं रही। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के आने के बाद से लगातार इस विभाग पर शिकंजा कसा जा रहा है। अटल आरोग्य लैब योजना से एक तरह से मुफ्त में जांच होने से मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी राहत मिलेगी। क्योंकि जांच के नाम पर ही सबसे अधिक लूट प्रायवेट अस्पतालों में होती रही है।
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