आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने की थी संविधान की हत्या :हर्षिता पांडेय

आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने की थी संविधान की हत्या :हर्षिता पांडेय

सारंगढ़

भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती हर्षिता पांडेय ने आज कहा कि कांग्रेस पार्टी ने आपातकाल लगाकर संविधकन की हत्या की थी, आज वो किस मुंह से संविधान की बात करती है।

श्रीमती हर्षिता पाण्डेय आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने की पूर्व संध्या पर स्थानीय केसरवानी धर्मशाला में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रही थीं।
श्रीमती हर्षिता पांडे ने आपात काल क्यों लगा ?आपातकाल में कांग्रेसी सरकार ने क्या किया ? पूरे देश में स्थिति क्या रही ? आपातकाल में क्या हुआ ? इन सभी प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि – इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लोकसभा चुनाव को अवैध ठहरा दिया । उन्हें 6 साल तक चुनाव लड़ने से आयोग करार दिया गया।जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संपूर्ण क्रांति आंदोलन पूरे देश में तेज हो रहा था। सरकार विरोधी प्रदर्शन, हड़ताल व असंतोष तेजी से बढ़ रहा था , तब इंदिरा गांधी ने देश में आंतरिक अस्थिरता और अव्यवस्था का हवाला देते हुए आपात काल लगा दिया । आपातकाल में जो हुआ वह बेहद शर्मनाक था पहले तो कांग्रेस ने संविधान की हत्या कर दी, लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए ।

श्रीमती हर्षिता ने बताया कि नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता और न्यायालय में गिरफ्तारी को चुनौती देने का अधिकार तक रद्द कर दिए गए । जयप्रकाश नारायण , अटल बिहारी वाजपेई , मोरारजी देसाई , लाल कृष्ण आडवाणी , राजनाथ सिंह समेत 9000 नेताओं और लाखों कार्यकर्ताओं को जेल में बंद कर दिया गया । अखबारों पर सेंसरशिप लागू कर दी गई । बिना सरकारी अनुमति के कोई भी खबर का प्रकाशन नहीं किया जा सकता था। इंदिराजी के पुत्र संजय गांधी के नेतृत्व में जबरन परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाया गया। जिससे लोगों में भारी असंतोष फैला , लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अंकुश लगाते हुए संसद को एक तरफा चलाया गया । न्यायपालिका की स्वतंत्रता सीमित हुई ।

प्रदेश प्रवक्ता हर्षिता पांडे ने कहा कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक कुल 21 महीने आपातकाल अर्थात काला कालखंड था। यह काल खंड यह भी दर्शाता है कि – संवैधानिक शक्तियों का दुरुपयोग किस प्रकार से नागरिकों के अधिकारों को कुचल सकता है , लेकिन इस संकट के बाद लोकतंत्र की पुनः बहाली ने भारतीय जनता की चेतना और संविधान की मजबूती को भी प्रमाणित किया था । कांग्रेस ने 1961, 1962 , 1965 1971 और 1972 में जो किया वह पूरी तरह से संविधान विरोधी रहा । इंदिरा गांधी की ही देन सिंधु समझौता रहा, जिसे 2025 में मोदी सरकार ने रद्द किया।
इन 11 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश संविधान के अनुरूप प्रगति पथ पर अग्रसर है।

प्रारम्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता भाजपा के दिग्गज नेता भुवन मिश्रा ने आपातकाल की पृष्ठभूमि को बताते हुए कहा कि आपातकाल में लाखों विपक्षी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को मीसा और डीआईआर कानून के तहत जेल में डाला गया । उन्हें न तो न्यायालय जाने का अधिकार था और न हीं जमानत का । समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगा दी गई थी ।

मंच संचालन भाजपा नेता हरिनाथ खूंटे के द्वारा किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडे , भाजपा जिला अध्यक्ष ज्योति पटेल , पूर्व विधायक श्रीमती केराबाई मनहर , पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल , जगन्नाथ केसरवानी , मनोज मिश्रा , मनोज जायसवाल के साथ साथ अन्य भाजपा नेता उपस्थित रहें ।

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