
नई दिल्ली 22 /05/021मई: कोरोना संकट के बीच प्लाजमा थेरेपी को लेकर आईसीएमआर और एम्स ने बड़ा फैसला लिया है। टास्क फोर्स ने कोरोना मरीजों को दी जा रही प्लाज्मा थेरेपी को क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल से हटा दी है। आईसीएमआर समेत अन्य विशेषज्ञ पहले से ही प्लाज्मा थेरेपी पर सवाल उठाते रहे हैं। कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी को लेकर पिछले कई दिनों से सवाल उठाए जा रहे थे।

आईसीएमआर ने कोविड मरीजों के इलाज के लिए नई गाइडलाइंस भी जारी की हैं। एम्स/आईसीएमआर-कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स/ज्वाइंट मॉनिटरिंग ग्रुप, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने एडल्ट कोरोना रोगियों के मैनेजमेंट के लिए क्लिनिकल गाइडेंस में बदलाव किया है। साथ ही ICMR ने कोविड उपचार प्रोटोकॉल के एक भाग के रूप में प्लाज्मा को हटा दिया है।

नेशनल टास्क फोर्स की बैठक में सभी सदस्य इस पक्ष में थे कि प्लाजमा थेरेपी को कोरोना इलाज पद्धति से हटाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कोरोना थेरेपी प्रभावी नहीं है और कई मामलों में इसका अनुचित रूप से इस्तेमाल किया गया है। प्लाज्मा थेरपी बीमारी की गंभीरता या मौत की संभावना को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। प्लाज्मा थेरेपी को कायलसेंट प्लाज्मा थेरेपी भी कहा जाता है।

इसमें कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति के शरीर से प्लाज्मा निकालकर संक्रमित व्यक्ति की बॉडी में इंजेक्शन की मदद से इंजेक्ट किया जाता है।
आईसीएमआर की नई गाइडलाइंस में कोविड मरीजों के इलाज को तीन भागों में बांटा गया है। इसमें हल्के लक्षण वाले मरीज, मध्यम लक्षण वाले और गंभीर लक्षण वाले मरीज शामिल हैं। हल्के लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में रहने का निर्देश दिया गया है, जबकि मध्यम और गंभीर संक्रमण वाले मरीजों को क्रमश: कोविड वॉर्ड में भर्ती और आईसीयू में भर्ती करने के लिए कहा गया है।
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