बिलासपुर, 8 फरवरी
पुरानी पेंशन योजना जारी रखने और आठवां वेतन आयोग का गठन करने सहित कर्मचारियों की ज्वलंत मांगों को लेकर अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर प्रदेश के कर्मचारी 16 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में सहभागिता करेंगे। हड़ताल की तैयारी के सिलसिले में राज्य भर में राज्य कर्मचारियों से संपर्क अभियान निरंतर जारी है। इसी क्रम में कर्मचारियों की गेट मीटिंगों का सिलसिला आज शुरू हुआ। बिलासपुर में विभिन्न विभाग के कर्मचारियों की गेट मीटिंग शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय संपन्न हुई इस मीटिंग में विभाग के सैकड़ों कर्मचारी शामिल हुए। मीटिंग को छत्तीसगढ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ की प्रांतीय संरक्षक देवेन्द्र पटेल , प्रांतीय सचिव अमित नामदेव, जिला संरक्षक आर पी शर्मा,पी आर कौशिक, जिला अध्यक्ष चन्द्रशेखर पाण्डेय, उपाध्यक्ष रमेश कुमार तिवारी, सचिव देवेंद्र ठाकुर, राजेश दुबे, विशालदास खांडेकर, कोषाध्यक्ष विनय विश्वकर्मा, कार्यालय सचिव कौशल कौशिक, महिला प्रकोष्ठ से सष्मिता शर्मा,आर पी डायमंड,सरोज आर्मो, अपर्णा चौधरी, सुषमा वालिया, अर्चना लाउत्रे, अनिता दुबे तहसील शाखा अध्यक्ष श्रीकांत मिश्र तखतपुर, जगदीश प्रसाद साहू मस्तूरी,दीपक चौधरी बिल्हा, धनंजय चतुर्वेदी कोटा,राजेश दुबे सकरी,शहर अध्यक्ष अश्वनी तिवारी, विकासखण्ड शाखा अध्यक्ष केशव चन्द्र वर्मा बिल्हा, रमाकांत कौशिक कोटा, प्रमोद कुमार भारद्वाज तखतपुर महेंद्र कौशिक, सुमंत पाण्डेय, अश्वनी क्षत्रिय,भीखम कौशिक,डी आर श्रीवास, नरेंद्र पाठक, शिवशंकर श्रीवास, देवेन्द्र केसरवानी, देवेन्द्र सराफ,आदि ने संबोधित किया।

सभी वक्ताओं ने 16 फरवरी के आंदोलन में बढ़चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। उपस्थित कर्मचारियों ने आंदोलन को पूर्ण सफल बनाने के लिए 16 फरवरी को बिलासपुर में नेहरू चौक पर होने वाले विशाल प्रदर्शन तथा रैली में शामिल होने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने आंदोलन की मांगों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरकार से हमारी मांग है कि पीएफआरडीए अधिनियम को निरस्त करें, एनपीएस मद में जमा राशि 41 हजार करोड़ लौटाई जाये, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में
परिभाषित पुरानी पेंशन योजना जारी रखी जाए, संविदा/आउटसोर्स/दैनिक वेतन पर नियुक्तियाँ बंद करें, सभी संविदा कार्मिको को नियमित करें, सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में सभी रिक्त पदों को तत्काल भरें, सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण बंद करें और सरकारी विभागों का आकार घटाना भी बंद किया जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रद्द करें, संविधान के अनुच्छेद 310, 311 (2) (ए), (बी), और (सी) को निरस्त किया जाए, कर्मचारी विरोधी आदेश व परिपत्र वापस लें। प्रत्येक पांच वर्ष की अवधि में एक बार वेतन संशोधन लागू करें, आठवां वेतन आयोग अविलंब गठित करें, जब्त किये गये अठारह महीनों के डीए/डीआर सहित समस्त बकाया का भुगतान करें। राज्य सरकार कर्मचारियों के लंबित डी ए का शीघ्र भुगतान करें, सातवें वेतन मान का बकाया किस्त का भुगतान करें, संशोधित पदस्थापना वाले शिक्षकों का चार महीने का लंबित वेतन का भुगतान करें तथा इच्छुक कर्मचारियों के तुरंत स्थानांतरण करने सहित छत्तीसगढ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के मांगपत्र का शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण किया जाए। महंगाई पर रोक लगाएं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करें। बैठक में विभिन्न विभाग के समस्त संवर्गों के कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
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