बिलासपुर रीजन में भाजपा को पिछला प्रदर्शन दोहराना चुनौती

बिलासपुर रीजन में भाजपा को पिछला प्रदर्शन दोहराना चुनौती

– अखिल पांडे

बिलासपुर रीजन की 19 सीटों पर भाजपा अपने प्रदर्शन को दोहराना बड़ी चुनौती है। पिछले चुनाव जब कांग्रेस की सुनामी थी, तब इस इलाके में कांग्रेस की लहर जैसी कोई स्थिति नहीं थी। बल्कि कांग्रेस को 19 सीटों में मात्र 7 सीट ही मिली थी। जबकि भाजपा को भी  07 और जोगी कांग्रेस व बसपा गठबंधन को 05 सीटें मिली थी। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने अपना प्रदर्शन सुधारते हुए मरवाही सीट पर जीत दर्ज की थी। कोरबा क्षेत्र को छोड़ दिया जाए तो जोगी व बसपा प्रभावित इन क्षेत्रों में भाजपा को प्रदर्शन दोहराना काफी मुश्किल है। क्योंकि इन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार पहले के मुकाबले कम है।
अविभाजित बिलासपुर जिले की 19 सीटों पर करीब-करीब तस्वीर साफ हो चुकी है। बेलतरा में भाजपा प्रत्याशी घोषित नहीं हुआ है ( सुशांत शुक्ला प्रत्याशी होंगे!)। लेकिन बाकी सीटों पर तस्वीर वर्तमान में जो दिखाई दे रही है उसका विश्लेषण करें तो कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधा मुकाबला फिलहाल दिख रहा है। हालांकि यह स्थिति जल्द बदलने वाली है। लेकिन वर्तमान में इन सीटों पर भाजपा के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले चुनाव में जहां पर कांग्रेस की लहर पूरे प्रदेश में देखने को मिला था। लेकिन बिलासपुर के इर्द-गिर्द विधानसभा क्षेत्रों में इसका असर बिल्कुल नहीं देखने को मिला। बिलासपुर से लगते भाटापारा व बलौदा बाजार में भी त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति में भाजपा व जोगी कांग्रेस को जीत मिली थी।

भाजपा व जोगी कांग्रेस की सीटों का जो नक्शा बनता है वह एक-दूसरे से मिले हुए हैं। यानी मरवाही, कोटा, लोरमी, मुंगेली, बिल्हा, मस्तूरी, बेलतरा, अकलतरा, जांजगीर, पामगढ़ और जैजैपुर इसके साथ ही अकलतरा सीट से लगते रामपुर व बिल्हा सीट से लगे भाटापारा व बलौदाबाजार विधानसभा सीट पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। यह सारे विधानसभा क्षेत्र आपस में जुड़े हुए हैं। इनकी संख्या 14 है। कुछ स्थानों में कांग्रेस मुकाबले में भी नहीं रही यानी तीसरे स्थान पर चली गई थी। इस तरह से यहां का मिजाज देखा जाए तो न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस के लिए भी बिलासपुर रीजन इस चुनाव में बड़ी चुनौती पेश करेगा। हालांकि जोगी कांग्रेस व बसपा की वह बखत नहीं जो पिछले चुनाव में थी। जैजैपुर में भाजपा ने इस बार यहां कुर्मी प्रत्याशी कृष्णकांत चंद्रा को उम्मीदवार बनाया है। जो बसपा के लिए आसान नहीं है। इधर अकलतरा में कांग्रेस का वोट काटने के लिए बसपा व आप पार्टी के प्रत्याशी भाजपा के लिए रास्ता साफ करने मदद पहुंचा सकते हैं। पामगढ़ में इस बार भाजपा कड़ी टक्कर देते हुए नजर आ रही है। क्यूंकि यहां का समीकरण कांग्रेस पर निर्भर करता है। यहां पर कांग्रेस का मजबूत प्रत्याशी बसपा को मदद करता है जबकि कांग्रेस का कमजोर प्रत्याशी भाजपा को मदद करता है। जांजगीर में स्थिति अभी साफ नहीं हुई है। फिलहाल कांग्रेस के व्यास कश्यप मजबूत प्रत्याशी हैं। अगर कोई बगावत नहीं हुआ तो व्यास का चुनाव जीतना आसान हो जाएगा। इधर मस्तूरी में पिछले चुनाव में बसपा दूसरे स्थान पर रही थी। लेकिन बसपा के वरिष्ठ नेता दाऊराम रत्नाकर के चुनाव लड़ने व चांदनी भारद्वाज के बगावत से मुकाबला टक्कर का बनता दिख रहा है। सबसे बड़ी बात बिलासपुर शहर की है तो यहां पर भाजपा से अमर अग्रवाल व कांग्रेस से शैलेश पांडे के बीच सीधा मुकाबला दिखाई दे रहा है। लेकिन यह वास्तव में फिलहाल साफ नहीं है। मेरा ख्याल है कि आने वाले दिनों में कोई मजबूत ब्राह्मण प्रत्याशी सामने आ सकता है। जिसे भाजपा व कांग्रेस के  असंतुष्टों द्वारा दोनों तरफ से बैक सपोर्ट मिलेगा। हालांकि अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। बेलतरा की सीट भी इतना आसान नहीं जिस तरह से दिखाई दे रहा है। भाजपा प्रत्याशी की घोषणा रविवार को हो जाएगी ऐसा अनुमान है। यहां से सुशांत शुक्ला को प्रत्याशी बनाए जाने की अधिक संभावना है। लेकिन आने वाले दिनों में त्रिकोणीय मुकाबले की नौबत सामने आएगी ऐसा मेरा आकलन है। तखतपुर में संतोष कौशिक, लोरमी में सागर सिंह बैस, बिल्हा में राजेंद्र शुक्ला समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

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