अखिल पांडे
बेलतरा में कटकी नहीं लगी तो सुशांत की टिकट पक्की
बिलासपुर संभाग की एक सीट बेलतरा में भाजपा उम्मीदवार घोषित करना बाकी है। लेकिन यहां प्रत्याशियों को लेकर जिज्ञासा लगातार गहराती जा रही है। भाजपा में पांच सीटों पर प्रत्याशी घोषित करना बाकी था। जिसकी वजह से यह सोच थी कि, पंडरिया सीट पर जल्द प्रत्याशी घोषित किया जाना है। तो इस प्रत्याशी के साथ ही बाकी 4 प्रत्याशियों की घोषणा हो जाएगी। लेकिन भाजपा ने अपनी तीसरी सूची में पंडरिया सीट की घोषणा कर दी है। अब बाकी के 4 प्रत्याशियों की घोषणा बाकी है। इसमें से बेलतरा सीट पर सबसे ज्यादा कौतुक की स्थिति देखने को मिल रही है। इस सीट पर वरिष्ठ नेताओं के बीच मनमुटाव भी सामने आ रहा है। सह प्रभारी नितिन नवीन बेलतरा से सुशांत शुक्ला को जिताऊ प्रत्याशी मान रहे हैं। जबकि स्थानीय नेता पूर्व विधायक पुत्र के पक्ष में है। बड़ी बात यह है कि यहां से ब्राह्मण प्रत्याशी घोषित किया जाना तय है। क्योंकि बिलासपुर संभाग में एक भी ब्राह्मण प्रत्याशी बीजेपी ने अभी तक नहीं दी है। पंडरिया सीट पर भाजपा ने जातिगत समीकरण को नजरअंदाज करते हुए भावना बोहरा को प्रत्याशी बनाया है। जबकि कवर्धा जिले में एक ब्राह्मण प्रत्याशी विजय शर्मा को टिकट दिया जा चुका है। इसके बाद दूसरी सीट भी ब्राह्मण प्रत्याशी भावना बोहरा शर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है। इस लिहाज से जिताऊ प्रत्याशी के रुप में सुशांत शुक्ला को प्रत्याशी बनाये जाने की संभावना बढ़ गई है। इसके अलावा बेलतरा से कांग्रेस प्रत्याशी विजय केशरवानी एनएसयूआई से निकले नेता हैं। और कांग्रेस जिला अध्यक्ष भी है। इसलिए भाजपा पर यह दबाव बन गया है कि विजय केशरवानी के विरुद्ध दमदार प्रत्याशी घोषित करें। हिसाब से देखा जाए तो सुशांत की टिकट पक्की लग रही है। लेकिन कटकी लगी तो दूसरे दावेदारों की फौज है।
बिलासपुर पुलिस की कटकी पर चुनाव आयोग बेखबर
वैसे कटकी शब्द छत्तीसगढ़ मे ंप्रयोग नहीं होता। लेकिन पिछले दिनों प्रधानमंत्री व गृह मंत्री अपनी सभाओं में कटकी शब्द को ब्रह्मास्त्र की तरह प्रयोग कर रहे हैं। दरअसल, कट मनी या चावल का पूरा दाना में टूटन हो तो उसे कटकी या कनकी कहते हैं। लेकिन यहां पर कट मनी यानी पूरे राजस्व में कटकी मारना है। कुछ इसी तरह का काम बिलासपुर पुलिस कर रही है। दरअसल, चुनाव आचार संहिता के तहत देर रात डीजे, पावर जोन पर प्रतिबंध रहता है। लेकिन बिलासपुर में धड़ल्ले से लाखों-करोड़ों रुपये के प्रोग्राम हो रहे हैं। जिसमें बॉलीवु़ड के कलाकार बिलासपुर पहुंच रहे हैं। पूरी रात डीजे के धुन पर युवा नवरात्रि के नाम पर अश्लील गानों पर थिरकते नजर आ रहे हैं। लेकिन बिलासपुर पुलिस है कि कौन सी कटकी हाथ बांधे बैठी है की देर रात का कार्यक्रम बेधड़क हो रहा है। इससे पहले चुनाव में पुलिस ने इस तरह के कार्यक्रम को साढ़े दस बजे तक सिमित कर दिया था। लेकिन पुलिस प्रशासन आचार संहिता को किनारे रख किस बात पर मुग्ध होकर थिरक रही है यह पता चुनाव आयोग को लगाना चाहिए।
सराफा व्यापारी परेशान हवाला कारोबारियों की बल्ले-बल्ले
चुनाव आचार संहिता के नाम पर आए दिन सोने-चांदी के जेवरात पुलिस पकड़ रही है। संभाग में इस तरह की खबरें रोज देखने को मिल रही है। व्यापारी चाहे बिल हो तो भी सराफा व्यापारियों से सोने-चांदी पकड़ने में पुलिस देरी नहीं करती। इसके पीछे की कहानी यह है कि, मीडिया में आम जनता पर कड़ी कार्रवाई का धाक जमाने के लिए पुलिस सराफा व्यापारियों पर पिल पड़ी है। लेकिन मीडिया में खबर छपने के बाद सराफा व्यापारियों को छोड़ दिया जाता है। इधऱ हवाला कारोबारियों पर पुलिस किस तरह से नजरअंदाज कर रही है यह कम लोगों को ही मालूम है। करोड़ों रुपये का नकद लेन-देन चुनाव के समय होता है यह कौन नहीं जानता। लेकिन यह बिना हवाला कारोबारियों के मार्फत काम होना असंभव है। लेकिन मजाल है कि पुलिस इन पर हाथ डाल दे। पुलिस इस मामले में अभी तक एक भी हवाला कारोबारियों पर कार्रवाई नहीं की है। मतलब पुलिस और हवाला कारोबारियों के बीच जो मजबूत जोड़ है उस पर कोई पानी नहीं फेर पा रहा है। कुल मिलाकर पुलिस प्रशासन के दोनों हाथ डुबकी लगाने में मस्त है। इस सबमें राज्य चुनाव आयोग जिस तरह से सख्ती दिखाई थी वह अब क्यूं देखने को नहीं मिल रहा है, यह समझ नहीं आ रहा।
भाजपा के लिए सिंधी समाज का बढ़ता दबाव
इस बार भाजपा से सिंधी समाज के किसी ब्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया है। चार सीटों पर घोषणा बाकी है। इसमें अंबिकापुर से राजेश अग्रवाल की टिकट पक्की मानी जा रही है। तो कसडोल से ओबीसी को टिकट दिया जाएगा। बेलतरा में संघ का दबाव और स्थानीय नेताओं के दबाव के इस बीच किसे टिकट मिलेगा यह सबसे बड़ी क्यूरियोसिटी है। लेकिन बेमेतरा को लेकर भाजपा में सिंधी समाज का लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।यहां जनता कांग्रेस से भाजपा में आए योगेश तिवारी से मजबूत दावेदारी है। संपत अग्रवाल, धर्मजीत सिंह को टिकट दिया गया है उसी तरह योगेश तिवारी की टिकट पक्की मानी जा रही थी। लेकिन सिंधी समाज के बढ़ते दबाव के बीच भाजपा आलाकमान को यह फैसला करना है कि यहां सिंधी समाज से टिकट दें या फिर योगेश तिवारी को!
अटल सीट में अटल का रास्ता साफ !
बिलासपुर की कोटा सीट पर 2018 के चुनाव में पहली बार कांग्रेस की हार हुई थी। हालांकि कांग्रेस से बगावत कर यहां पर रेणु जोगी चुनाव लड़ी थी। इसके पहले वे यहां से कांग्रेस विधायक थी। लेकिन स्वतंत्रता के बाद कोटा कांग्रेस का गढ़ था वह ठह गया और जोगी कांग्रेस को यहां पर त्रिकोणीय मुकाबले में जीत मिली। अब कांग्रेस की अटल सीट पर अटल श्रीवास्तव को प्रत्याशी बनाये जाने पर लग रहा है कि यह सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित हो जाएगी। वैसे यहां पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति पिछले चुनावों से बन रही है। इस बार अटल मैनेजमेंट की परीक्षा है कि वे गोंगपा के कोर वोट आदिवासी वोट को मैनेज कर पाते हैं या नहीं। क्यूंकि पिछले कुछ समय से आदिवासी वोटों का ध्रुवीकरण तेजी से हुआ है। लेकिन गोंगपा का अन्य पार्टियों से तालमेल का जो दबाव है, उससे गोंगपा ऊबर नहीं पा रही है। जिसके कारण ध्रुवीकरण सुस्त दिख रहा है। कुल मिलाकर फिलहाल अटल श्रीवास्तव के लिए रास्ता साफ नजर आ रहा है।
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