– अखिल पांडे
चुनावी पारा उतरा भूपेश सरकार लौटी
17 अगस्त को भाजपा ने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी की थी। अचानक लिस्ट जारी होने से एक तरह से राज्य में राजनीतिक भूचाल आ गया था। राज्य सरकार भी चुनावी मोड में आ गई थी। यानी सरकार जहां आम जनता के बीच अपने कामों का बखान करने में लगी थी, वहां राज्य शासन के बजाय कांग्रेस पार्टी की भूमिका अहम हो गई थी। उम्मीदवारों के चयन के लिए भागमभाग मच गया था। इधर भाजपा प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने सितंबर के पहले सप्ताह में प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट जारी करने की बात कर कांग्रेस में बेचैनी पैदा कर दी थी। पूरे सेनोरियो को देखा जाए तो एक तरह से सरकार का इकबाल कम और पार्टी का प्रभाव बढ़ गया था। भाजपा व कांग्रेस में चुनावी मैनेजमेंट कमेटी की घोषणा धड़ाधड़ होने लगी। पूरी मीडिया चुनावी संभावनाओं वाली खबरों से अटी थी। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के कार्यक्रम अचानक रद्द होने से यह संदेश गया कि, मुख्यमंत्री पार्टी काम में उलझे हुए हैं। लेकिन आखिरकार प्रदेश सरकार के लिए राहत वाली बात यह रही कि, भाजपा की दूसरी लिस्ट एक माह बाद भी जारी नहीं हो पाई तो, इधर रोज-रोज भूपेश सरकार के फूल पेज के विज्ञापन, सेंट्रल लीडरशिप की अगुवाई में बड़े सरकारी कार्यक्रम और कैबिनेट मीटिंग में महत्वपूर्ण फैसलों के बीच एक बार फिर से प्रदेश सरकार का वैभव लौट आया है। भाजपा की दूसरी लिस्ट इस माह नहीं आएगी यह तय है। भाजपा प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने स्पष्ट कर दिया है कि, प्रत्याशियों का चयन हो चुका है, घोषणा कभी भी हो सकती है। यानी परिवर्तन यात्रा के समापन 30 सितंबर के बाद दूसरी लिस्ट आएगी। सूत्रों का कहना है कि अब सूची में प्रत्याशियों की संख्या बढ़ जाएगी। यानी पहले डेढ़ दर्जन टिकट घोषित करने की बात हो रही थी। अब करीब 30 लोगों के टिकट की घोषणा हो जा सकती है।
भाजपा प्रत्याशियों की टिकट में बदलाव नहीं
भाजपा द्वारा घोषित 21 प्रत्याशियों के खिलाफ लगातार विरोध को देखते हुए यह बात उठ रही थी कि, इस लिस्ट में कुछ हेरफेर हो सकता है । क्योंकि कुछ सीटों पर लगातार विरोध हो रहा है और प्रत्याशियों के चुनाव अभियान में परेशानी आ रही है। लेकिन केंद्रीय नेताओं द्वारा लगातार मान मनौव्वल और विधानसभा क्षेत्रों में हुए दौरों के बाद स्थिति बदली है। आज ओम माथुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफतौर पर कहा कि प्रत्याशियों में कोई भी बदलाव की गुंजाइश नहीं है।
टिकट वितरण में महिला आरक्षण की छाया
यह अलग बात है कि, महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद भी फिलहाल आरक्षण लागू नहीं हो रहा। लेकिन बिल पास होने के बाद यह भी माना जाना चाहिए कि, दोनों ही पार्टी भाजपा व कांग्रेस टिकट वितरण में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने विशेष रुप से ध्यान देंगे। भाजपा की पहली लिस्ट में 21 में से 5 महिला को प्रत्य़ाशी बनाया गया है। इस लिहाज से पहली लिस्ट में 20 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया गया है, जो पिछली बार से अधिक है। वैसे देश के सभी राज्यों में बंगाल के बाद छत्तीसगढ़ में महिला प्रतिनिधित्व अधिक है, जो 13 प्रतिशत से बढ़कर है। इस स्थिति में सिद्धांततः सहमति को धरातल में दिखाना आवश्यक हो जाता है। इसलिए दोनों ही पार्टी अधिक महिलाओं को टिकट देने की कोशिश करती नजर आए तो यह स्वाभाविक है। कांग्रेस में इस बात के संकेत अभी से मिलने लगे हैं कि हर लोकसभा क्षेत्र में दो महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगी। जबिक ओम माथुर ने महिलाओं को अधिक टिकट देने की बात कही, लेकिन जिताऊ उम्मीदवार पर उन्होंने अधिक बल दिया है। कुल मिलाकर बदले परिदृश्य से महिला दावेदारों की संख्या न केवल बढ़ेगी बल्कि चुनाव तैयारी कर रही महिलाओं की दावेदारी और पक्की हो जाएगी। मुश्किल उन पुरुष दावेदारों की होगी जो चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके हैं।
भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्साह में लगेंगे पर !
भाजपा में उत्साह में पर नहीं लग पा रहा है। पहली लिस्ट घोषित होने के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह का जो संचार हुआ था, वह थम सा गया है। सशंकित कार्यकर्ता एक बार फिर इस नैराश्य के घेरे में है कि, केंद्रीय नेतृत्व दबाव में दूसरी लिस्ट नहीं जारी कर पा रहा है। ऐसे में कमजोर उम्मीदवार का चयन न हो इसकी आशंका भाजपा कार्यकर्ताओं को है। खासकर के 15 साल के शासन में उन चेहरों को जो पिछले चुनाव में लोगों ने नकार दिया था उन्हें फिर से मौका न दिया जाए। दरअसल, आज भी भाजपा नेता डेढ़ दशक तक ठसक के साथ शासन करने व मलाई खाने वाले दिनों को नहीं भूल पाए हैं। सड़क की लड़ाई तो दूर की बात, आम लोगों से मेलजोल में भी कन्नी काटते हैं। उन्हें फिर से टिकट दिया जाता है तो भाजपा की संभावना खत्म हो जाएगी, यह बात आम कार्यकर्ताओं की जुबान पर है। खासकर के कारोबारी किस्म के लोगों को टिकट दिए जाने पर भारी नाराजगी सामने आ सकती है। अब जबकि दूसरी लिस्ट पर फैसला हो चुका है और सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की मीटिंग में सूची टेबल करने के बाद दूसरी लिस्ट जारी किया जाना है। तो आशंका अपनी जगह बनी हुई है। देखना है कि भाजपा में धनबल वाले नेताओं को टिकट दिया जाता है या जिताऊ लोगों को।
पीएससी की गरिमा और कितनी गिरेगी!
पीएससी लगातार आरोपों के घेरे में है। अशोक दरबारी से लेकर अब तक चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस बार कुछ ऐसा हुआ कि हाईकोर्ट ने जिन लोगों के सलेक्शन में संदेह दिखा उनकी नियुक्ति में रोक लगा दी गई है। ऐसे डेढ़ दर्जन नियुक्ति पर रोक लगी है। पीएससी चेयरमैन व सचिव के रिश्तेदार इस चयन में सबसे अधिक लाभान्वित हुए हैं। वैसे पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी का भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है। जिला पंचायत के सीईओ थे तभी अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चित थे। जांजगीर-चांपा जिले के करीब एक दर्जन ग्राम पंचायतों में प्रत्येक को करोड़ों रुपये का काम दे दिया गया था। दस साल पहले एक पंचायत को साल में 20 लाख का काम मिले वह भी काफी था। करोड़ों रूपये मिले ग्राम पंचायतों में कामकाज कागजों में हुआ था। जिसकी वजह से वे खूब चर्चा में थे। क्यूंकि ये सरपंच रातों रात मालमाल हो गए थे। यह बात भी सामने आई है कि उनका पुत्र जो डिप्टी कलेक्टर के लिए चयनित हुआ है, वह डेयरी व्यवसाय से जुड़ा था!
ब्राह्मणों को पक्ष में लाने की रणनीति बाकी
भूपेश सरकार ने बिलासपुर में ब्राह्मण समाज को बड़ा तोहफा देते हुए दो एकड़ जमीन समाज के नाम किया है। इससे भाजपा के कोर वोट पर सेंध लग गया है। लेकिन अब भूपेश सरकार ब्राह्मणों को अपने पक्ष में करने के लिए एक बड़ी रणनीति पर काम कर रही है। बताया जाता है कि अब भूपेश सरकार रायपुर व दुर्ग जिले में भी समाज के नाम पर 2 एकड़ भूमि देने की तैयारी में है। इसके अलावा दक्षिण के राज्यों में ब्राह्मण समाज के लिए अलग बोर्ड का गठन किया गया है। उसे प्रदेश में कैसे लागू करें इस पर भी काम किया जा रहा है। आचार संहिता लागू होने के पहले तक इस पर कोई फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है।
चर्चा में--0- फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार भाजपा की टिकट पर दिल्ली के चांदनी चौक से चुनाव लड़ सकते हैं
-0- प्रदेश में गोंगपा आधा दर्जन सीट जीतने के अपने लक्ष्य में मजबूत दिख रहा है
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