अखिल पांडे
राहुल की वापसी और हवा बदली
करीब सवा सौ दिनों बाद राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से सुप्रीम राहत मिल गई। लेकिन जब से उनकी सांसदी गई थी तब से अब तक उनके उपनाम की चर्चा थम सी गई थी। राजस्थान व छत्तीसगढ़ में संगठन में एकजुटता लाई गई थी उसके लिए भी राहुल गांधी को क्रेडिट दिया गया। इस दौरान सोशल मीडिया में पप्पू शब्द पर लगभग चर्चा बंद हो गई थी। लेकिन अब एक बार फिर से हवा का रुख देखने वाली बात होगी। क्यूंकि आईटी सेल वाले भी ऊर्जा खपाने में लग गए हैं।
रमेश दाऊ के आने से बढ़ जाती है चर्चा
महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस के रायपुर आने पर राजनीतिक चर्चा बढ़ जाती है। इस बार उनका जन्मदिन राजधानी में मनाया गया। और फिल भी डिफरेंट किस्म का था। प्रदेश के विभिन्न पंथों के प्रमुखों को इस कार्यक्रम में बुलाया गया। दाऊ जी का भाषण भी भावपूर्ण था। सो इस बार चर्चा भी विशेष हो रही है। ठीक चुनाव से पहले जब कयासों का दौर हो तो दाऊ जी को लेकर तरह-तरह की चर्चा स्वाभाविक है।
भेंट-मुलाकात में अव्यवस्था, अफसरों के पर तो नहीं निकले!
“फर्स्ट इंप्रेशन इज लास्ट इंप्रेशन” की तर्ज पर युवाओं से मुलाकात का कार्यक्रम बना है।ताकि मुख्यमंत्री की छवि लंबे समय तक युवाओं के मन में बरकरार रहे l मुख्यमंत्री युवाओं से सीधे बात करते हैं और इस दौरान महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए जा रहे हैं। इससे युवा वर्ग में मुख्यमंत्री की छवि निश्चित रूप से सकारात्मक बनेगी। लेकिन बिलासपुर में हुए कार्यक्रम की अव्यवस्था अनेक तरह के संदेह पैदा करते हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में तमाम आला अधिकारी मौजूद थे। इसके बावजूद कार्यक्रम में अव्यवस्था इसलिए भी सवाल खड़े करते हैं कि ऐन चुनाव आला अधिकारी अगर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर गंभीर नहीं है, तो आचार संहिता लगने के बाद क्या स्थिति होगी। बिलासपुर के जिस इंडोर स्टेडियम में यह कार्यक्रम हुआ वहां एसी नहीं लगी है। लेकिन तापमान नियंत्रित करने के लिए अच्छे कूलर की व्यवस्था की जा सकती थी पर ऐसा हुआ नहीं। ऊपर से मुख्यमंत्री को अचानक सड़क मार्ग से आना पड़ा जिससे कार्यक्रम शुरू होने में काफी देरी हो गई। इंडोर स्टेडियम में कूलर की व्यवस्था जरूर की गई थी, लेकिन बिना पानी के कूलर चलाया गया। इसके बाद स्टेडियम के अंदर गर्मी व उमस की स्थिति ऐसी थी कि, ठसाठस भरे युवा सुबह दस बजे से स्टेडियम में पहुंच चुके थे और गर्मी से बेहाल हो चुके थे। भला हो मौसम का जो उस दिन तेज धूप नहीं थी।इधर साउण्ड सिस्टम ऐसी की एक छोर से दूसरे छोर आवाज ही नहीं पहुंच रही थी। मुख्यमंत्री को बच्चों से संवाद करने में काफी कठिनाई हुई। भोजन व्यवस्था नहीं होने के कारण कॉलेज के बच्चे परेशान हुए सो अलग। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री के लिए आखिरी समय में भोजन व्यवस्था की गई। वह भी केवल दस लोगों के लिए जबकि मौके पर मंत्री, विधायक व निगम मंडल अध्यक्ष ही दर्जन भर से अधिक थे।
2.प्रदेश भाजपा की रणनीति हो रही लीक
गृह मंत्री अमित शाह के रायपुर में हुई पार्टी की रणनीतिक बैठकों की खबरें लीक हो रही है। पार्टी मुख्यालय में होने वाली बैठकों की खबरें लीक करने वालों पर केंद्रीय नेताओं की नजर है। इस मामले में सह प्रभारी केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया की पैनी नजर है। बताया जाता है कि इस मामले में कार्यालय प्रभारी नरेश गुप्ता को कुछ एक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
3.भाजपा के दिग्गज चुनाव में उतरेंगे
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा 15 सीटों में सिमट गई थी। इसके बाद कार्यकर्ताओं का जो उत्साह गिरा है उसे उठाना संगठन के लिए बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि जो कठिन सीट हैं उस पर दिग्गज नेताओं को चुनाव लड़ाने पर विचार हो रहा है। इस हिसाब से देखा जाए तो आसान सीटों पर भाजपा के बड़े नेताओं की सीटें बदल सकती है। अरुण साव को लोरमी व कोटा सीट से लड़ने की बात हो रही थी, लेकिन यह सीट जोगी कांग्रेस ने जीती थी। तब साव को बिलासपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहा जा सकता है। जबकि डा. रमन सिंह को राजनांदगांव के बजाय कवर्धा से चुनाव लड़ाया जा सकता है। इधर अन्य सांसदों को भी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा जाए तो बड़ी बात नहीं होगी।
15 अगस्त के बाद राजनीतिक सक्रियता बढ़ेगी
संसद का मॉनसून सत्र 11 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस को लेकर व्यस्तता होगी। यही कारण है कि फिलहाल राजनीतिक गतिविधियां धीमी हो गई है। 7 अगस्त को प्रधानमंत्री का रायगढ़ दौरा रद्द कर अब 17 अगस्त को तय किया गया है। कुल मिलाकर 15 अगस्त के बाद सभी दलों को विधानसभा चुनाव के लिए फिर से सक्रिय होने का मौका मिलेगा।
5..तीसरा मोर्चा कौन आगे कौन पीछे
कांग्रेस व भाजपा के मुकाबले में तीसरी पार्टी की भूमिका को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। हालांकि बसपा ने अपने वर्तमान विधायकों को फिर से प्रत्याशी बनाने की घोषणा की है। वहीं मस्तुरी से दाऊराम रत्नाकर को टिकट दिये जाने के संकेत दे दिए हैं। इधर आप पार्टी भी संगठन में नई नियुक्तियां की है। लेकिन आप पार्टी की जमीनी सक्रियता जो दिखनी चाहिए वह नहीं दिख रही है। माना जा रहा है कि, सत्तारूढ़ भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए के खिलाफ नया गठबंधन इंडिया बनी है, उसमें आप पार्टी भी शामिल है। इसी वजह से शायद कांग्रेस के खिलाफ खुलकर चुनावी मैदान में आप पार्टी सामने नहीं आ रही है।इधर सर्व आदिवासी समाज के संयोजक अरविंद नेताम ने प्रदेश के 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। 29 एसटी एससी रिजर्व सीट के साथ बाकी सामान्य सीटों पर भी चुनाव लड़ने का फैसला किया गया है। जिन सामान्य सीटों पर एससी एसटी के मतदाता अधिक हैं वहां भी एसएएस प्रत्याशी उतारेंगे। हालांकि अरविंद नेताम ने छोटे दलों से गठबंधन कर चुनाव लड़ने की बात कही है।
- राज्य के तीन शहरों के रेलवे स्टेशन बनेंगे भव्य
किसी भी शहर के लिए पार्क, स्टेडियम, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन आदि जगहों से तय होता है कि शहर कैसा है। केंद्र का रेलवे स्टेशन संवारने का प्रोजेक्ट बड़ा ही महत्वाकांक्षी है। बिलासपुर, रायपुर व दुर्ग रेलवे स्टेशन को संवारने के लिए करीब डेढ़ हजार करोड़ खर्च होंगे। बाकी स्टेशन को भी चरणबद्ध तरीके से सौंदर्यीकरण किया जाएगा। लेकिन बिलासपुर रेलवे स्टेशन को फिर से बनाने में 435 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रायपुर स्टेशन में 470 करोड़, दुर्ग में 455 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हालांकि अन्य स्टेशन पर 10 से 15 करोड़ खर्च हो रहे हैं लेकिन छत्तीसगढ़ के तीन प्रमुख शहरों बिलासपुर, रायपुर व दुर्ग के रेलवे स्टेशन का करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये खर्च कर अगले 32 माह में कायाकल्प करने का दावा किया जा रहा है। जो किसी भी शहर के लिए प्रतीकात्मक स्थान होगा। - कवर्धा में रहे एसपी का जलवा
डॉ. रमन सिंह के 15 वर्षों के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में अपने गृह जिला कवर्धा व राजनांदगांव का विशेष ख्याल किया था। यही कारण था कि कवर्धा में बेस्ट आईएएस व आईपीएस की नियुक्ति की गई। 2005 से 2010 के बीच कवर्धा में आनंद छाबड़ा फिर पी.सुंदर राज और उसके बाद बद्रीनारायण मीणा को एसपी नियुक्त किया गया था। वर्तमान में तीनों ही अफसर आईजी रैंक पर पदस्थ हैं। आनंद छाबड़ा वर्तमान मुख्यमंत्री के चहेते अधिकारी हैं, जो उनके गृह जिले दुर्ग से बिलासपुर आईजी बने हैं। इधर पी. सुंदरराज तीन साल से अधिक हो चुके बस्तर के आईजी हैं। पी. सुंदर राज का जलवा ऐसा है कि उनका विकल्प प्रदेश सरकार खोज नहीं पा रही है। इधर कवर्धा में एसपी रहते बीएन मीणा क्रिकेट के प्रति इस तरह समर्पित थे कि ऑफिस भी क्रिकेटमय हो गया था। लेकिन समय के साथ मीणा साब ने पुलिसिंग में जो कसावट लाई वह गजब है। यही कारण है कि वे रिकॉर्ड लगातार 9 जिलों के एसपी रह चुके हैं। अब वे दूसरी बार मुख्यमंत्री के गृह जिले में आईजी बनकर पहुंच चुके हैं।
Author Profile





