अखिल पांडे
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प्रदेश में मुद्दा हिंदुत्व और भाजपा
पिछले कॉलम में मैंने लिखा था कि, कांग्रेस के लिए हिंदुत्व का मुद्दा छत्तीसगढ़ में प्रयोगशाला की तरह है। यह बात सौ टका सही साबित हो रही है। दो दिनों पहले प्रदेश के बड़े पत्रकार सुनील कुमार ने अपने यू-ट्यूब चैनल में यहां तक कह दिया कि, प्रदेश में हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा यहां कांग्रेस की बी टीम दिखाई दे रही है। जैसा कि, पिछले कॉलम में अपना लॉजिक था कि, छत्तीसगढ़ में हिंदुत्व का प्रयोग कांग्रेस अपने आपको राष्ट्रीय पटल पर एक नई छवि के साथ गढ़ रही है। भूपेश सरकार ने भांचा (भांजा) राम व माता कौशल्या की ब्रांडिंग नये कलेवर के साथ की है। साथ ही प्रदेश के सांस्कृतिक उत्थान के लिए सरकार काम कर रही है। उससे आम जन स्वाभाविक रूप से जुड़ेंगे। जैसे तीजा-पोला पर्व, हरेली पर्व, गोवर्धन पूजा को गौठानों में मनाना यह सब हिन्दू मान्यताओं को आगे बढ़ाने की पहल है। भूपेश सरकार के इस कदम से भाजपा के कोर वोट पर सेंध लगेगा।
अकबर को लेकर कांग्रेस की क्या है सोच
जब हिंदुत्व के मुद्दे पर कांग्रेस भाजपा से एक कदम आगे है तब यह सोच बनती है कि आखिर मंत्री मोहम्मद अकबर को लेकर कांग्रेस क्या सोच रखती है। क्या कांग्रेस अकबर को कवर्धा से टिकट देने का जोखिम उठाएगी। क्योंकि कवर्धा में हिन्दू-मुस्लिम तनाव हुआ था, उसके बाद 50 किलोमीटर दूर बेमेतरा जिले के बिरनपुर में इन दोनों समुदाय में टकराव व हत्या के मामले सामने आए थे। ऐसे में इन क्षेत्रों में हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण रोकने के लिए कांग्रेस क्या अकबर की सीट बदलने पर विचार कर सकती है। क्योंकि कवर्धा से अकबर को टिकट दिया गया तो आसपास के सीटों पर इसका नुकसान कांग्रेस को हो सकता है। लेकिन मोहम्मद अकबर कवर्धा से पहली बार चुनाव लड़े हैं। इसलिए वे कवर्धा सीट पर चुनाव लड़ना शायद पसंद भी न करें। 2008 व 2013 में अकबर पंडरिया से चुनाव लड़े थे। इससे पहले वे कवर्धा जिले के विलोपित विधानसभा सीट विरेंद्रनगर से चुन कर विधायक बने थे। अब देखना है कि इस क्षेत्र में कांग्रेस अकबर को लेकर क्या रणनीति अपनाती है।
लता दीदी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
बस्तर से लता उसेंडी को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया जाना पार्टी का बड़ा कदम है। भाजपा के लिए इस चुनाव में बस्तर के महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। मोहन मंडावी व केदार कश्यप के बाद लता उसेंडी भाजपा में बस्तर की बड़ी नेत्री बन गई हैं। उनका कद जिस तरह से डॉ. रमन सिंह व सरोज पांडे के समकक्ष बढ़ाया गया है उससे बस्तर का किला फतह करने में काफी मदद मिल सकती है। हालांकि ़डॉ रमन सिंह का अपना वजूद है। भाजपा के पास वर्तमान में लगातार पंद्रह साल तक मुख्यमंत्री रहने वाला कोई नेता नहीं है। शिवराज सिंह चौहान हाल ही में मुख्यमंत्री के रूप में 15 साल पूरे किए हैं, लेकिन वे लगातार मुख्यमंत्री नहीं रहे।
ताम्रध्वज को बिलासपुर का प्रभार
बिलासपुर जिले का प्रभार मंत्री जयसिंह अग्रवाल से लेकर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू को दिया गया है। राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर अरुण साव की ताजपोशी होने के बाद साहू वोट का ध्रुवीकरण स्वाभाविक रूप से हो सकता है। लेकिन ताम्रध्वज को जिले का प्रभार मिलने से साहू समाज का ध्रुवीकरण रोकने में मदद मिलेगी।
रायगढ़ रीजन भाजपा के लिए महत्व का
गृह मंत्री अमित शाह का अगला दौरा 7 अगस्त से पहले एक बार फिर से होगा। सूत्रों के मुताबिक 5 अगस्त को एक बार फिर से अमित शाह का दौरा हो सकता है। रायगढ़ में प्रधानमंत्री प्रवास से पहले समीक्षा बैठक होगी। लेकिन यह भी समझना होगा कि, रायपुर के बाहर यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा कही तय किया गया है तो वह रायगढ़ है। इसलिए राजनीतिक दृष्टि से यह दौरा मेरे हिसाब से काफी महत्वपूर्ण है। रायगढ़ रीजन में आने वाले दिनों में भाजपा की क्या रणनीति होगी यह भी देखने वाली बात होगी। क्या इस क्षेत्र में कांग्रेस पहले से कमजोर हुई है या फिर यहां कोई फूट है जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। यह भी नजरअंदाज करना मुनासिब नहीं होगा कि, रायगढ़ के आगे का बेल्ट भाजपा प्रभावित रही है। जो पिछले चुनाव में भाजपा का किला ढह गया था। ऐसे में भाजपा को अगर सबसे अधिक गुंजाइश रायगढ़ रीजन में देखने को मिल रही है तो यह रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है। जहां पर राजधानी से बाहर प्रधानमंत्री का पहला चुनावी शंखनाद होगा। हालांकि इस राजनीतिक कार्यक्रम की सफलता ओपी चौधरी का कद प्रदेश भाजपा में बढ़ा देगा।
सतनामी वोट की चिंता में भाजपा
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सतनामी वोट को लेकर भाजपा में माथापच्ची हो रही है। सतनामी समाज के महंत चुनाव के पहले सक्रिय हो जाते हैं यह हर चुनाव में देखा गया है। इस बार सतनामी समाज के गुरु व महंत भाजपा के संपर्क में है। दरअसल, प्रदेश के अजा रिजर्व सीटों पर कांग्रेस का प्रभाव है। 10 में से केवल एक मस्तुरी सीट पर भाजपा जीती है। इसलिए रणनीति अब इन रिजर्व सीटों के लिए बनेगी। 9 सीटों में जहां कांग्रेस जीती है वहां पर अधिकांश कांग्रेस विधायकों की रिपोर्ट अच्छी नहीं है। कुछ विधायक अपनी सीट बदलना चाहते हैं। इस स्थिति में जब प्रदेश भाजपा की रणनीति अमित शाह देख रहे हैं तो आगे क्या स्थिति बन सकती है यह विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है।
सर्व आदिवासी समाज व गोंगपा
मणिपुर हिंसा के विरोध में बस्तर में सर्व आदिवासी समाज ने बस्तर बंद का आह्वान किया था। सरकार के मंत्री कवासी लखमा ने भी इस बंद का समर्थन किया और बंद का असर भी देखा गया। पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम सर्व आदिवासी समाज के संयोजक हैं। आगामी चुनाव में सर्व आदिवासी समाज व गोंडवाना गणतंत्र पार्टी सक्रिय हो चुकी है। जब प्रदेश में तीसरा मोर्चा का अस्तित्व नहीं दिख रहा है तो आने वाले दिनों में सर्व आदिवासी समाज प्रदेश की छोटी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। हालांकि यह देखना होगा इस गठबंधन का नुकसान कांग्रेस व भाजपा में किसे उठाना पड़ेगा।
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